UP Electricity Rate Relief:उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम मानी जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह लगातार सातवां साल होगा, जब प्रदेश में बिजली की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। बढ़ती महंगाई के बीच बिजली दरों का स्थिर रहना आम लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर योजना के खर्च को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
आयोग की बैठक में हुई अहम चर्चा
बुधवार को Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार ने की।
इस दौरान पावर कॉरपोरेशन की तरफ से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश की गई वार्षिक राजस्व आवश्यकता यानी ARR पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति और उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया।
उपभोक्ता परिषद ने किया बड़ा दावा
बैठक में उपभोक्ता परिषद ने दावा किया कि बिजली कंपनियों के पास करीब 51 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त सरप्लस मौजूद है। परिषद का कहना है कि जब कंपनियों के पास इतना पैसा उपलब्ध है, तब बिजली दरें बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि इस सरप्लस राशि का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो बिजली दरों में बड़ी राहत दी जा सकती है। उनके मुताबिक, या तो एक बार में करीब 45 प्रतिशत तक दरें कम की जा सकती हैं या फिर अगले पांच साल तक हर साल लगभग 8 प्रतिशत की राहत दी जा सकती है।
24 घंटे बिजली देने की उठी मांग
बैठक में प्रदेशभर में रोस्टर व्यवस्था खत्म करने की मांग भी उठाई गई। उपभोक्ता परिषद का कहना था कि जब लोग समय पर बिजली बिल जमा कर रहे हैं, तो उन्हें 24 घंटे लगातार बिजली मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार और बिजली विभाग से गांव और शहर दोनों इलाकों में बिना कटौती के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
स्मार्ट मीटर योजना पर बढ़ा विवाद
बैठक में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना को लेकर भी सवाल उठाए गए। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस योजना का करीब 3,838 करोड़ रुपये का खर्च सीधे उपभोक्ताओं पर डालना गलत है। परिषद का कहना है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक स्मार्ट मीटर योजना लागू करते समय आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। लेकिन अगर पूरा खर्च उपभोक्ताओं से वसूला गया तो लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
लोगों की नजर अब सरकार के फैसले पर
अब सभी की नजर सरकार और विद्युत नियामक आयोग के अगले फैसले पर टिकी है। अगर बिजली दरें स्थिर रहती हैं तो यह प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी। वहीं स्मार्ट मीटर के खर्च को लेकर भी आने वाले दिनों में बड़ा फैसला लिया जा सकता है।


