UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सीटों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। खासकर एनडीए गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर चर्चा और दावेदारी का दौर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सहयोगी दलों ने बढ़ाया दबाव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनडीए के सहयोगी दल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। पूर्वांचल में पहले ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और नेता Om Prakash Rajbhar कई सीटों पर अपनी सक्रियता दिखा चुके हैं। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सीटों को लेकर नई राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
आरएलडी ने रखा बड़ा दावा
राष्ट्रीय लोकदल के नेता Jayant Chaudhary की पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी संख्या में सीटों पर अपनी दावेदारी जताई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी करीब पैंतीस से चालीस विधानसभा सीटों की मांग कर रही है। इस दावे ने गठबंधन के भीतर नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
मुरादाबाद बैठक के बाद बढ़ी चर्चा
बताया जा रहा है कि मुरादाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद जयंत चौधरी ने अपनी कोर कमेटी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जमीनी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। इससे यह संकेत मिला कि पार्टी आगामी चुनाव को लेकर पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहती है।
पिछले चुनाव से अलग रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार आरएलडी पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई देना चाहती है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर सीमित सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन अब एनडीए का हिस्सा बनने के बाद वह अपनी राजनीतिक ताकत के अनुरूप अधिक हिस्सेदारी चाहती है।
गठबंधन की राजनीति पर नजर
सीटों की मांग को राजनीतिक दबाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। चुनाव नजदीक आते ही सहयोगी दल अक्सर अपनी ताकत और प्रभाव दिखाने की कोशिश करते हैं, ताकि सीट बंटवारे के समय उन्हें बेहतर अवसर मिल सके। ऐसे में आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर बातचीत और तेज होने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सीट बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह से विभिन्न सहयोगी दल अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं, उससे साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति आने वाले महीनों में और अधिक दिलचस्प होने वाली है। सभी की नजर अब इस बात पर है कि गठबंधन के भीतर सीटों का अंतिम फार्मूला क्या तय होता है।









