Hindi Cinema में फिल्म की सफलता सिर्फ कहानी या स्टारकास्ट पर ही नहीं, बल्कि उसके टाइटल पर भी काफी निर्भर करती है। एक आकर्षक नाम दर्शकों की रुचि बढ़ा सकता है, लेकिन कभी-कभी वही टाइटल बदनसीबी की कहानी भी बन जाता है।
बॉलीवुड में एक ऐसा ही चर्चित उदाहरण ‘कर्ज’ टाइटल से जुड़ा है, जिसे लेकर फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से चर्चा होती रही है।
1980 में शुरू हुआ ‘कर्ज’ का सफर
Karz (1980 film) पहली बार 1980 में रिलीज हुई थी, जिसमें Rishi Kapoor मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में सिमी गरेवाल और टीना अंबानी भी नजर आई थीं। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, लेकिन इसके गाने जैसे “ओम शांति ओम” और “एक हसीना थी” आज भी बेहद लोकप्रिय हैं और इसे एक कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला।
‘कर्ज’ नाम से बनी कई फिल्में, लेकिन सफलता कम
इसके बाद 1990 के दशक में ‘कर्ज’ नाम से कई फिल्में बनीं, जिनमें Doodh Ka Karz और Pyar Ka Karz शामिल हैं। इन फिल्मों में जैकी श्रॉफ, नीलम कोठारी, धर्मेंद्र और मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े सितारे नजर आए, लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकीं।
1991 में एक साथ तीन फिल्में और सभी फ्लॉप
साल 1991 में ‘कर्ज’ टाइटल से तीन फिल्में रिलीज हुईं—कर्ज चुकाना है, महान कर्ज और खून का कर्ज। इनमें से कई फिल्मों में बड़े स्टार्स जैसे रजनीकांत, विनोद खन्ना और संजय दत्त शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकीं।
2002 और 2008 में भी दोबारा कोशिश
Karz: The Burden of Truth (2002) में Sunny Deol, सुनील शेट्टी और शिल्पा शेट्टी नजर आए, लेकिन यह भी फ्लॉप साबित हुई।
इसके बाद 2008 में आई Karzzzz, जिसमें Himesh Reshammiya और उर्मिला मातोंडकर मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर पाई।
‘कर्ज’ टाइटल को मिला मनहूस टैग
लगभग तीन दशकों में ‘कर्ज’ टाइटल से बनी ज्यादातर फिल्में या तो फ्लॉप रहीं या औसत प्रदर्शन कर सकीं। इसी वजह से फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच इसे “मनहूस टाइटल” तक कहा जाने लगा।






