NEET UG 2026 Re Exam: अक्सर माना जाता है कि एक उम्र के बाद लोग अपने बड़े सपनों को पीछे छोड़ देते हैं, लेकिन लखनऊ के रहने वाले 70 वर्षीय अशोक बहार ने इस सोच को गलत साबित करने की कोशिश की है। NEET UG 2026 की पुनः परीक्षा में शामिल होकर उन्होंने यह संदेश दिया कि सीखने और अपने लक्ष्य को पाने की कोई तय उम्र नहीं होती।आलमबाग स्थित गुरु नानक महाविद्यालय गर्ल्स इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर जब अशोक बहार पहुंचे तो उनकी मौजूदगी ने छात्रों, अभिभावकों और सुरक्षा कर्मियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सुरक्षा जांच के दौरान हुआ विवाद
परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले सुरक्षा जांच के दौरान अशोक बहार से उनकी बेल्ट, चश्मा और घड़ी उतारने को कहा गया। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि इन चीजों के बिना उन्हें असुविधा होती है। हालांकि परीक्षा नियमों के अनुसार सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें सामान बाहर रखने के लिए कहा।इसके बाद उन्होंने अपना सामान अपने ड्राइवर अवधेश को सौंप दिया और निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया।
MBBS करने की इच्छा ने दिलाया नया लक्ष्य
अशोक बहार पहले एक खाद कंपनी में मार्केटिंग प्रमुख के पद पर काम कर चुके हैं। उन्होंने एमबीए की पढ़ाई भी की है। उनकी पत्नी डॉ. मंजुल बहार अमेरिका में चिकित्सक हैं और परिवार में कई डॉक्टर होने के कारण उनके अंदर भी चिकित्सा क्षेत्र में आने की इच्छा जागी।उनका कहना है कि दवाओं और चिकित्सा क्षेत्र की जानकारी होने के बावजूद मेडिकल डिग्री के बिना मरीजों को सलाह नहीं दी जा सकती। इसी कारण उन्होंने डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए NEET परीक्षा देने का फैसला किया।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षण की मांग
अशोक बहार ने वरिष्ठ नागरिक अभ्यर्थियों के लिए कम से कम एक प्रतिशत आरक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि जो छात्र दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते, उन्हें पुराने स्कोर के आधार पर काउंसिलिंग का मौका मिलना चाहिए।
कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई परीक्षा
NEET UG 2026 री-एग्जाम के दौरान सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए। अभ्यर्थियों की बायोमीट्रिक जांच की गई और उन्हें घड़ी, चेन, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जूते-मोजे समेत कई वस्तुएं बाहर रखने के बाद ही प्रवेश दिया गया।परीक्षा को लेकर फैली अफवाहों और पेपर लीक जैसी चर्चाओं ने कई छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराई जा सकें।






