Delhi students Protest : दिल्ली में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ आने के बीच उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उसके बाद राहुल गांधी व अखिलेश यादव की हिरासत के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम और प्रशासनिक समीक्षा के दौरान उन्होंने सपा और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं को आगे करके राजनीति करने की कोशिश की जा रही है। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा विपक्ष के पुराने रिकॉर्ड को अच्छी तरह जानता है और उसे आसानी से गुमराह नहीं किया जा सकता।
योगी ने खोली भर्ती की ‘कुंडली’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में आयोग के अध्यक्ष पद पर ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया गया, जो इस जिम्मेदारी के योग्य नहीं था। योगी ने दावा किया कि एक समय 86 SDM पदों पर भर्ती हुई थी, जिसमें 56 अभ्यर्थी एक ही जाति विशेष से चुने गए थे। मुख्यमंत्री ने इसे भर्ती प्रक्रिया में कथित पक्षपात का उदाहरण बताते हुए कहा कि योग्य और मेधावी अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज वही राजनीतिक दल छात्रों के हितैषी बनने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके शासनकाल में भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
अखिलेश पर सीधा वार
योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में अखिलेश यादव के पुराने शासनकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हाईस्कूल में थर्ड डिवीजन से पास छात्र को SDM परीक्षा में टॉपर बना दिया गया था। हालांकि, यह मुख्यमंत्री द्वारा लगाया गया राजनीतिक आरोप है और इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण या आधिकारिक रिकॉर्ड इस दिए गए कंटेंट में प्रस्तुत नहीं किया गया है। योगी ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार ने 2017 के बाद सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता दी है। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार के दौरान भर्तियां बिना रिश्वत, सिफारिश और जातिगत भेदभाव के पूरी की गई हैं।
PDA पर भी निशाना
मुख्यमंत्री के ’86 में 56′ वाले दावे को समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है। सपा लगातार युवाओं के बीच बेरोजगारी, पेपर लीक और सरकारी भर्तियों जैसे मुद्दे उठा रही है। इसके जवाब में बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सपा के पुराने शासनकाल की भर्ती व्यवस्था और कथित जातिवाद को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच यह नैरेटिव वॉर और तेज हो सकता है।
2027 से पहले बढ़ेगी सियासी गर्मी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच सपा और बीजेपी के बीच युवाओं को लेकर राजनीतिक लड़ाई तेज होती दिख रही है। अखिलेश यादव मौजूदा सरकार को बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ सपा सरकार के पुराने कार्यकाल का हवाला देकर विपक्ष पर पलटवार कर रहे हैं। अब मुख्यमंत्री के ’86 में 56 SDM’ वाले दावे पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा। अगर सपा इस आरोप का जवाब देती है तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल दिल्ली से शुरू हुई राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीतिक साझेदारी का असर लखनऊ तक साफ दिखाई दे रहा है और दोनों खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है।









