FCRA Bill JPC:संसद में किसी विधेयक का पेश होना और उसका तुरंत कानून बन जाना जरूरी नहीं है। कई बार सरकार किसी महत्वपूर्ण या विवादित बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी Joint Parliamentary Committee (JPC) के पास भेजती है। इसका उद्देश्य बिल की धाराओं की गहराई से जांच और सभी पक्षों की राय लेना होता है। 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 यानी FCRA Bill को JPC भेजने का प्रस्ताव मंजूर हुआ। विपक्ष ने इस कदम का विरोध किया, जबकि सरकार ने इसे विस्तृत संसदीय जांच की प्रक्रिया बताया।
JPC में कौन होता है
JPC संसद की ऐसी समिति है जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल होते हैं। इसमें सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के सदस्य भी रहते हैं। समिति को बिल की अलग-अलग धाराओं की बारीकी से समीक्षा करने का अधिकार होता है। जरूरत पड़ने पर यह विशेषज्ञों, संगठनों और संबंधित हितधारकों से सुझाव भी मांग सकती है। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है। हालांकि JPC की सिफारिशें महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन सरकार के लिए उन्हें स्वीकार करना अनिवार्य नहीं होता।
2024 के बाद कितने बिल
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसदीय समितियों के पास भेजा गया है। इनमें वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 सबसे चर्चित रहा। इसे अगस्त 2024 में संयुक्त समिति को भेजा गया था। इसके बाद दिसंबर 2024 में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक को भी संयुक्त समिति के पास भेजा गया। दोनों प्रस्ताव वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े थे और संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर इन्हें 20 दिसंबर 2024 को JPC भेजे जाने की जानकारी दर्ज है।
पुराने कार्यकाल का रिकॉर्ड
2014 से 2024 के बीच भी मोदी सरकार के दौरान कई बड़े विधेयक JPC की जांच के लिए भेजे गए। इनमें भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक, इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, नागरिकता संशोधन विधेयक, FRDI बिल, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, जैव विविधता संशोधन विधेयक और बहु-राज्य सहकारी समितियां संशोधन विधेयक शामिल रहे। जन विश्वास विधेयक और वन संरक्षण संशोधन विधेयक भी इस सूची में रहे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में कुल 9 विधेयक JPC को भेजे गए।
बिल JPC भेजने का मतलब
किसी विधेयक को JPC के पास भेजने का मतलब यह नहीं है कि सरकार उसे वापस ले रही है या कानून नहीं बनाना चाहती। इसका अर्थ है कि बिल पर दोनों सदनों के सांसदों के जरिए ज्यादा विस्तृत जांच की जाएगी। खासकर जटिल प्रावधानों, राजनीतिक मतभेदों या व्यापक सार्वजनिक प्रभाव वाले विधेयकों में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। समिति सुझावों के आधार पर बदलाव की सिफारिश भी कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला संसद और सरकार की विधायी प्रक्रिया के तहत ही होता है।
FCRA Bill पर क्या होगा
FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act से जुड़े प्रस्तावित बदलाव विदेशी चंदे और विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों से संबंधित हैं। सरकार का कहना है कि संशोधनों से विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत होगी। वहीं विपक्ष और कुछ संगठनों ने इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में बिल को JPC भेजे जाने से इन प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा का मौका मिलेगा। समिति अलग-अलग पक्षों की राय लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके बाद विधेयक की आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी।







