भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली। 19 अगस्त को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। BSE Sensex 325.78 अंक टूटकर 76,909.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 76.60 अंकों की गिरावट रही और यह 24,078.30 पर आ गया।
बाजार में गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। इस तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत लगातार ऊपर जा रही है। बुधवार को Brent crude oil 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ी।
Power Grid और ITC समेत कई बड़े शेयर गिरे
आज सेंसेक्स के 30 शेयरों में से ज्यादातर लाल निशान में बंद हुए। Power Grid, ITC, Bajaj Finance, L&T और HUL जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। दूसरी तरफ HCL Tech, Eternal, Kotak Mahindra Bank, Sun Pharma और Titan जैसे शेयरों में खरीदारी रही और ये बढ़त के साथ बंद हुए।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव रहा। Nifty Midcap 100 Index में 0.36 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 0.53 फीसदी नीचे बंद हुआ। इससे पता चलता है कि बाजार में बिकवाली का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।
ज्यादातर सेक्टरों में रही बिकवाली
सेक्टर के हिसाब से भी बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा। Nifty Auto, FMCG, Media, Metal, Pharma, PSU Bank, Private Bank, Realty, Healthcare और Oil & Gas जैसे सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
इसके अलावा Chemicals और Cement इंडेक्स में भी कमजोरी दिखाई दी। हालांकि IT और Consumer Durables इंडेक्स में हल्की बढ़त देखने को मिली। बाजार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के बावजूद कुल मिलाकर सेंटीमेंट कमजोर रहा।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर सीधे बड़े हमले के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका बढ़ गई है।
इसी बीच UAE की ओर से ईरान पर अनिश्चित समय के लिए व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने की खबर ने भी चिंता बढ़ाई है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण Brent crude की कीमत 0.56 फीसदी बढ़कर 91.51 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड भी बढ़कर 4.73 फीसदी हो गई। महंगा कच्चा तेल, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया और बाजार दबाव में आ गया।









