Unsafe Spices in India: भारतीय मसालों का स्वाद पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है, लेकिन अब इनकी गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में विदेशों में भारतीय कंपनियों के कुछ मसालों पर कार्रवाई की खबर सामने आई थी। अब राजस्थान में हुई जांच में पांच कंपनियों के सात मसालों के सैंपल असुरक्षित पाए जाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान सरकार की ओर से मसालों के कई सैंपल लिए गए थे। जांच के दौरान कुछ मसालों में ऐसे कीटनाशक रसायन तय सीमा से ज्यादा पाए गए, जिन्हें लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता जताई गई है। हालांकि, किसी भी रसायन की मौजूदगी का मतलब सीधे तौर पर यह नहीं है कि उस मसाले से कैंसर होगा। जोखिम उसकी मात्रा, लंबे समय तक सेवन और वैज्ञानिक सुरक्षा सीमा पर निर्भर करता है।
इन पांच कंपनियों के मसालों पर उठे सवाल
रिपोर्ट में MDH, Everest, Gajanand, Shyam और Sheeba Taza के कुछ मसालों के सैंपल का जिक्र किया गया है। इनमें अलग-अलग कीटनाशक रसायनों की मात्रा तय सीमा से ज्यादा होने का दावा किया गया है।
MDH के गरम मसाले में Acetamiprid, Thiamethoxam और Imidacloprid का जिक्र है। वहीं सब्जी मसाला और चना मसाला में Tricyclazole और Profenofos पाए जाने की बात कही गई है।
इसके अलावा Everest के जीरा मसाला, Shyam के गरम मसाला, Gajanand के अचार मसाला और Sheeba Taza के रायता मसाला के सैंपल में भी अलग-अलग कीटनाशक रसायनों की मौजूदगी का दावा किया गया है।
क्या मसालों से कैंसर का खतरा है?
कीटनाशकों और कैंसर के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग वैज्ञानिक अध्ययन मौजूद हैं। कुछ रसायनों को लेकर जानवरों पर किए गए अध्ययनों में चिंता सामने आई है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सामान्य मात्रा में मसाला खाने से इंसानों को कैंसर हो जाएगा।
यही वजह है कि खाद्य सुरक्षा नियमों में अलग-अलग कीटनाशकों की अधिकतम सुरक्षित सीमा तय की जाती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में तय सीमा से ज्यादा रसायन पाया जाता है, तो संबंधित विभाग उसकी बिक्री और गुणवत्ता को लेकर कार्रवाई कर सकता है।
FSSAI की भूमिका भी अहम
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े नियम तय करता है। मसालों में मिलावट या तय सीमा से ज्यादा रसायन पाए जाने पर जांच और कार्रवाई की जरूरत होती है।
इस मामले में भी अंतिम तस्वीर आधिकारिक जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही साफ होगी। इसलिए किसी भी ब्रांड के सभी उत्पादों को असुरक्षित मानना सही नहीं होगा। उपभोक्ताओं को आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही फैसला लेना चाहिए।

