Inflation Pressure: महंगाई अब सिर्फ सब्जियों और राशन तक सीमित नहीं रह गई है। घर में रोज इस्तेमाल होने वाली कई चीजों की कीमतों में बदलाव देखने को मिल रहा है। चीनी और प्याज के दाम में हालिया तेजी ने लोगों की चिंता बढ़ाई है, वहीं साबुन, डिटर्जेंट और खाने के तेल जैसी चीजों पर भी जेब ढीली हो रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 63 रुपये किलो और प्याज की करीब 43.53 रुपये किलो रही।
चीनी हुई महंगी
चीनी की कीमत इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक पिछले दो महीनों में घरेलू चीनी कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा उछाल आया है और कुछ बाजारों में यह करीब 70 रुपये किलो तक पहुंच गई है। हालांकि चीनी उद्योग का कहना है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मौजूदा तेजी का बड़ा कारण सट्टेबाजी है। सरकार ने कीमतों पर काबू पाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है।
प्याज ने रुलाया
प्याज की बढ़ती कीमत भी रसोई का बजट बिगाड़ रही है। सरकारी आंकड़ों में 24 अगस्त को औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये किलो दर्ज हुई, जबकि हालिया रिपोर्टों में कुछ बाजारों में कीमत 60 रुपये किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है। सरकार अब बफर स्टॉक से प्याज निकाल रही है और ज्यादा कीमत वाले शहरों में आपूर्ति बढ़ाने के लिए विशेष ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेनें चलाने की योजना शुरू कर चुकी है।
दाल-तेल पर दबाव
रसोई के दूसरे जरूरी सामान भी सस्ते नहीं हैं। 24 अगस्त के अखिल भारतीय औसत खुदरा आंकड़ों में अरहर दाल करीब 123.93 रुपये, उड़द 122.36 रुपये और मूंग दाल 112.17 रुपये किलो रही। पैक्ड सरसों तेल करीब 200.20 रुपये और मूंगफली तेल करीब 207.91 रुपये किलो दर्ज हुआ। यानी रोज की रसोई चलाने वाले परिवारों को कई मोर्चों पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
साबुन-डिटर्जेंट भी महंगे
महंगाई का असर केवल खाने-पीने की चीजों पर नहीं दिख रहा। हालिया रिपोर्टों के अनुसार साबुन और डिटर्जेंट जैसे घरेलू उत्पादों की कीमतों में भी 1 से 3 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई कंपनियां कीमत बढ़ाने के बजाय पैक का वजन कम करने का रास्ता भी अपना रही हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक को सामान खरीदते समय कीमत के साथ उसकी मात्रा पर भी नजर रखनी होगी।
आगे क्या होगा?
सरकार की कोशिशें फिलहाल चीनी और प्याज जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित करने की हैं। चीनी आयात और प्याज के बफर स्टॉक से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है। हालांकि त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने वाली है, इसलिए आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। आम परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राशन से लेकर घरेलू सामान तक बढ़ते खर्च के बीच महीने का बजट कैसे संभाला जाए।










