Gold Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में एक बार फिर तेज तेजी देखने को मिल रही है। सोमवार को सोना करीब 0.5 फीसदी चढ़कर 4,620 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया। यह कीमत तीन महीने के ऊंचे स्तर के करीब है। इससे पहले पिछले सप्ताह भी सोने में जोरदार तेजी रही थी और इसकी कीमत में 5 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ था।
अमेरिकी सरकार के कदम से क्यों बढ़ा सोना?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने लंबे समय वाले सरकारी कर्ज की खरीद बढ़ाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य बॉन्ड बाजार में उधारी की लागत को नियंत्रित करना और लंबे समय वाले सरकारी कर्ज पर दबाव कम करना है।
इस फैसले के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर पर दबाव देखने को मिला। कमजोर डॉलर को आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है।
अमेरिका के बढ़ते कर्ज ने बढ़ाई चिंता
सोने की तेजी में अमेरिका की वित्तीय स्थिति भी अहम भूमिका निभा रही है। सरकारी आय और खर्च के बीच बढ़ता अंतर और कर्ज पर बढ़ता ब्याज निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, अमेरिका की सरकारी आय करीब 5.5 लाख करोड़ डॉलर रह सकती है, जबकि खर्च लगभग 7.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी करीब 2 लाख करोड़ डॉलर का वित्तीय अंतर बनने की आशंका है।
इसके अलावा कर्ज पर ब्याज चुकाने में करीब 1 लाख करोड़ डॉलर खर्च होने का अनुमान है। करीब 10 लाख करोड़ डॉलर के कर्ज को दोबारा वित्तपोषित करने की जरूरत भी बताई जा रही है।
क्या अमेरिकी बॉन्ड से निवेश निकल रहा है?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने लंबे समय वाले सरकारी कर्ज की खरीद से जुड़े कार्यक्रम का आकार बढ़ाया है। कुछ खरीद अभियानों का आकार बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति अभियान किया गया है।
इस कदम से बॉन्ड बाजार में मांग और नकदी को सहारा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, 30 साल वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड अब भी ऊंचे स्तर के आसपास है। ऐसे में निवेशक यह देख रहे हैं कि सरकार का कदम बाजार को सिर्फ थोड़े समय के लिए राहत देता है या लंबे समय में भी असर डालता है।
क्या सरकारी बॉन्ड से पूरी तरह पैसा निकालना जरूरी है?
ऐसा जरूरी नहीं है। सोने में निवेश बढ़ाने की सलाह का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों को सभी सरकारी बॉन्ड बेच देने चाहिए।
एक रणनीति लंबे समय वाले बॉन्ड में हिस्सेदारी कम करके कुछ पैसा कम अवधि वाले सरकारी बॉन्ड या अन्य परिसंपत्तियों में रखना हो सकती है। असल मुद्दा किसी एक निवेश को चुनने के बजाय पोर्टफोलियो में अलग-अलग आर्थिक जोखिमों का संतुलन बनाना है।










