पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में हरियाणवी म्यूजिक वीडियो कलाकार अंकित बालियान की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या में शामिल बताए जा रहे दो संदिग्ध शूटर सुमित और मोहित रविवार देर रात हुई कथित मुठभेड़ में मारे गए। दोनों हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले थे। शामली पुलिस का कहना है कि दोनों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज थे और वे इस हत्याकांड में वांछित थे।
पुलिस ने क्या बताया
शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जांच में सामने आया था कि अंकित की हत्या में चार शूटर शामिल थे। पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही थी। रविवार रात करीब साढ़े तीन बजे चेकिंग के दौरान बागपत नंबर की बाइक पर सवार दो युवकों को रोकने का प्रयास किया गया। पुलिस का दावा है कि दोनों ने फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें आगे घेर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, एक डेड एंड पर घिरे संदिग्धों ने दोबारा गोलीबारी की, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में दोनों संदिग्ध घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई।
हथियार भी बरामद
एसपी ने बताया कि घायल आरोपियों को अस्पताल ले जाते समय उनकी पहचान सुमित पुत्र धर्मपाल और मोहित पुत्र महेश के रूप में हुई। दोनों सोनीपत के रहने वाले बताए गए हैं। उत्तर प्रदेश एसटीएफ भी इस मामले की जांच में जुटी थी। एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर चार शूटरों की पहचान हुई थी, जो दो मोटरसाइकिलों से फरार हुए थे। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में मारे गए दोनों युवकों के पास से आधुनिक हथियार बरामद हुए हैं। बाकी आरोपियों और गैंग से जुड़े लोगों की तलाश जारी है।
पिता ने जताया भरोसा
अंकित बालियान की 26 अगस्त की शाम शामली कोतवाली क्षेत्र में जिम से बाहर निकलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कथित मुठभेड़ के बाद अंकित के पिता भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि हत्या में शामिल बाकी दो शूटरों को भी जल्द पकड़ा जाना चाहिए। इससे पहले उन्होंने पुलिस को पांच दिन का समय देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर एफआईआर वापस लेने की बात कही थी। परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उन्हें पूरी तरह सुरक्षा का भरोसा नहीं होगा।
एनकाउंटर पर सवाल
मुठभेड़ के बाद केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी अंकित के गांव बंतीखेड़ा पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह गंभीर और सुनियोजित अपराध था तथा पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है। हालांकि, कथित एनकाउंटर को लेकर उन्होंने कहा कि इसे सुनियोजित नीति नहीं कहा जा सकता और परिस्थितियों के बारे में पुलिस ही जवाब देगी। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में पुलिस को गोली चलानी पड़ी।
यूपी में एनकाउंटर आंकड़े
उत्तर प्रदेश सरकार के मई 2026 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2017 से राज्य में 17,043 पुलिस मुठभेड़ें हुई हैं। इनमें 289 कथित अपराधी मारे गए, जबकि 11,834 घायल हुए और 34,253 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन अभियानों में 18 पुलिसकर्मियों की मौत और 1,852 के घायल होने की भी जानकारी दी गई है। सरकार इसे अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताती है, जबकि आलोचक और मानवाधिकार संगठन ऐसे मामलों में स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग करते रहे हैं।
कानून क्या कहता है
भारतीय कानून पुलिस को किसी आरोपी को सजा के तौर पर मारने की अनुमति नहीं देता। पुलिस केवल कानून में तय परिस्थितियों में, खासकर आत्मरक्षा या किसी अन्य व्यक्ति की जान बचाने के लिए जरूरी और अनुपातिक बल का इस्तेमाल कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में पुलिस मुठभेड़ों में मौत को लेकर कई दिशानिर्देश तय किए थे। इनमें एफआईआर, स्वतंत्र जांच, पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी और मजिस्ट्रियल जांच जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसलिए शामली की इस कथित मुठभेड़ की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।










