दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को छात्रों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। ताजा रिपोर्टों के अनुसार हादसे में पांच लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई।
मलबे में छात्र
सत्य निकेतन और इसके आसपास का इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों के छात्रों के रहने के लिए जाना जाता है। हादसे वाली इमारत में भी बड़ी संख्या में छात्र पीजी के तौर पर रह रहे थे। जानकारी सामने आने के बाद छात्रों के परिवारों में चिंता बढ़ गई। NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और दूसरी राहत एजेंसियां मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने में जुटीं। कुछ घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा गया।
राहुल गांधी का सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हादसे को बेहद दर्दनाक और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भी दबे होने की खबर है। राहुल गांधी ने बचाव दलों से हर छात्र तक पहुंचने और घायलों को तुरंत बेहतर इलाज देने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर छात्र की जिंदगी कीमती है और उसकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए।
हॉस्टल की कमी
राहुल गांधी ने हादसे के बहाने दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हॉस्टल की कमी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण छात्र निजी पीजी में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि कई जगह एक ही छत के नीचे 40-40 छात्र तक रहते हैं और ऐसी भीड़भाड़ वाली परिस्थितियां छात्रों के लिए खतरा बन सकती हैं।
मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। इस हादसे के बाद छात्र पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सुरक्षा जांच पर नजर
हादसे की असली वजह की जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में चल रहे निर्माण या बेसमेंट से जुड़े काम को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रशासन की ओर से राहत-बचाव के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर भी नजर है। हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त हॉस्टल व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है।








