Dhanteras 2026:पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही सोना, चांदी और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर शुभ कार्य करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन-धान्य की कमी नहीं रहती। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 6 नवंबर 2026 को धनतेरस मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं में इस दिन कुछ कामों को करने से बचने की सलाह दी गई है। माना जाता है कि इन गलतियों से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। आइए जानते हैं धनतेरस पर किन पांच बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. धारदार चीजें न खरीदें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, इस दिन कैंची, चाकू, कील और सुई जैसी धारदार चीजें खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसी वस्तुएं घर में नकारात्मकता ला सकती हैं।
2. पैसों का लेन-देन न करें
धनतेरस के दिन किसी को पैसे उधार देने या कर्ज लेने से बचने की मान्यता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर की आर्थिक समृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसलिए इस दिन धन से जुड़े लेन-देन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
3. कांच की चीजें न लाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर कांच की वस्तुएं खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए इस दिन कांच के सामान की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।
4. काले कपड़े पहनने से बचें
धनतेरस के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से भी बचने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, काला रंग नकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस अवसर पर शुभ रंगों के कपड़े पहनने की परंपरा है।
5. यम दीपक सही दिशा में जलाएं
धनतेरस की रात यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, सही दिशा में दीपक जलाने से इसका पूरा धार्मिक फल मिलता है।
Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय, लाभ, सलाह और मान्यताएं केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। न्यूज 1इंडिया इन बातों का समर्थन नहीं करता। हम अंधविश्वास के खिलाफ हैं। लेख में दी गई जानकारी विभिन्न माध्यमों, ज्योतिषियों, पंचांग, प्रवचनों, धार्मिक मान्यताओं, धर्मग्रंथों और लोककथाओं से संकलित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य या प्रमाणित दावा न मानें और अपने विवेक का उपयोग करें।






















