Foteworks Business: दिवाली हो या शादी, पटाखे जश्न का अहम हिस्सा माने जाते हैं। भारत में हर साल हजारों करोड़ रुपये के पटाखे बिकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन का दबदबा है। चीन का लियूयांग शहर दुनिया के सबसे बड़े पटाखा केंद्रों में शामिल है। आखिर भारत की इतनी बड़ी मांग के बावजूद चीन निर्यात में हमसे आगे कैसे निकल गया? तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TIDCO) के अनुमानों के मुताबिक, भारत में पटाखों का सालाना कारोबार करीब 7,000 करोड़ रुपये का है। तमिलनाडु का शिवकाशी देश में पटाखा निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां देश के कुल उत्पादन का लगभग 85 से 90 फीसदी हिस्सा तैयार होता है।
चीन से कितना पीछे
भारत में बनने वाले 99 फीसदी से ज्यादा पटाखे घरेलू बाजार में ही खप जाते हैं। दिवाली के आसपास करीब 30 दिनों में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। दूसरी तरफ, विश्व बैंक के WITS और UN Comtrade के आंकड़ों के मुताबिक, चीन ने 2025 में करीब 1.14 अरब डॉलर यानी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के पटाखे निर्यात किए।
लियूयांग का दबदबा
चीन के हुनान प्रांत में स्थित लियूयांग को दुनिया की पटाखा राजधानी कहा जाता है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, चीन के घरेलू पटाखा बाजार में इस शहर की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। वहीं, चीन के कुल पटाखा निर्यात में इसका योगदान लगभग 70 फीसदी बताया जाता है।
चीन में कैसे बने पटाखे
पटाखों का इतिहास चीन से जुड़ा माना जाता है। करीब एक हजार साल पहले बारूद की खोज के बाद वहां आतिशबाजी की शुरुआत हुई। इसके निर्माण में शोरा, गंधक और लकड़ी के कोयले का इस्तेमाल होता था। शुरुआत में बारूद को बांस के टुकड़ों में भरकर जलाया जाता था। इससे तेज आवाज और चिंगारियां निकलती थीं। धीरे-धीरे यही प्रयोग रंग-बिरंगी आतिशबाजी में बदल गया।
सफलता के कारण
लियूयांग में पहले से कुशल कारीगर और पटाखे बनाने का अनुभव मौजूद था। यहां पर्याप्त मजदूर मिलने से उत्पादन लागत कम रही। इसके अलावा महंगी मशीनों के बिना भी काफी काम हाथ से किया जा सकता था।
चीन ने पटाखों को केवल बिक्री तक सीमित नहीं रखा। लियूयांग में स्काई थिएटर के जरिए आतिशबाजी के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से शहर में 142 बड़े कार्यक्रम हुए, जिनमें 70 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। इस तरह आतिशबाजी पर्यटन और मनोरंजन का भी बड़ा माध्यम बन गई है।
सुरक्षा की बड़ी चुनौती
पटाखा उद्योग में आग और विस्फोट का खतरा हमेशा बना रहता है। मई 2026 में लियूयांग की एक फैक्ट्री में विस्फोट से 26 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 2025 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, 2010 से 2023 के बीच चीन में पटाखा उत्पादन से जुड़ी 136 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 107 हादसे लाइसेंस प्राप्त फैक्ट्रियों में हुए।
भारत के लिए क्या है सीख
भारत के शिवकाशी उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की है। चीन की सफलता के पीछे केवल सस्ता श्रम नहीं, बल्कि पुराना अनुभव, बड़े पैमाने पर उत्पादन, लगातार घरेलू मांग और मजबूत निर्यात नेटवर्क है।
भारत को भी अपने पारंपरिक पटाखा उद्योग में आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा और उत्पादन क्षमता पर ध्यान देना होगा। तभी शिवकाशी घरेलू बाजार से आगे बढ़कर दुनिया के पटाखा कारोबार में चीन को चुनौती दे सकेगा।















