बाघ मित्र परियोजना की सफलता
पीलीभीत टाइगर रिजर्व को 9 जून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। उस समय बाघ-इंसानी संघर्ष की घटनाएं आम थीं। बाघ अक्सर भोजन की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच जाते थे जिससे दहशत का माहौल बन जाता था। इस समस्या से निपटने के लिए पीटीआर और विश्व प्रकृति निधि (WWF) ने मिलकर ‘बाघ मित्र’ परियोजना शुरू की।
इस प्रोजेक्ट के तहत वन क्षेत्र से सटे गांवों के युवाओं को प्रशिक्षित किया गया जिससे वे बाघों के व्यवहार को समझ सकें और उनके पदचिह्न पहचान कर सही समय पर उचित कदम उठा सकें। इस पहल के शुरू होने के बाद से वन्य जीव-इंसानी संघर्ष की घटनाओं में काफी गिरावट आई है। पहले बाघ मित्रों की संख्या 60 थी लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए इसे बढ़ाकर 110 कर दिया गया है।
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पीटीआर मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान
पीलीभीत (Pilibhit News) टाइगर रिजर्व मॉडल की सफलता को देखते हुए अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जा रहा है। बिजनौर के अमानगढ़, राजस्थान के रणथंभौर और बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पीलीभीत की विशेषज्ञ टीमों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया गया है। अमानगढ़ में ‘तेंदुआ मित्र’ कार्यक्रम भी पीलीभीत के इसी मॉडल से प्रेरित होकर शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी इस मॉडल की प्रशंसा की है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसकी सराहना की है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वन्य जीव संरक्षण के प्रभावशाली नतीजे
पीटीआर में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। 2012 में यहां केवल 14 बाघ थे, जो 2014 में बढ़कर 27 हो गए। टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई और मौजूदा समय में 100 से अधिक बाघ पीटीआर में मौजूद हैं। इसके अलावा तेंदुआ, बारहसिंगा, साम्भर, रीछ, उड़न लोमड़ी, मगरमच्छ और घड़ियाल भी यहां पाए जाते हैं।
वन्य जीवों के लिए पीलीभीत (Pilibhit News) टाइगर रिजर्व का माहौल इतना अनुकूल है कि नेपाल से हाथियों के झुंड भी अक्सर यहां आ जाते हैं। इस परियोजना के सकारात्मक प्रभावों के चलते पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। पीटीआर का बाघ मित्र मॉडल वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक सफल उदाहरण बन चुका है और यह अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन रहा है।