भारत और जापान के बीच खेले गए पांच ओवर के मुकाबले में जापान की टीम ने अपने प्रदर्शन से रविचंद्रन अश्विन को प्रभावित किया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच ओवर में 32 रन बनाए, जबकि जापान की टीम 30 रन तक पहुंच गई।
भारत को आखिरकार यह मुकाबला सिर्फ दो रन से जीतने में सफलता मिली। अश्विन ने जापान की टीम के संघर्ष और गेंदबाजी के लिए अनुकूल पिच पर उसके प्रदर्शन की तारीफ की।
पिच देखकर खुश हुए
अश्विन ने अपने YouTube चैनल पर कहा कि इस मुकाबले में उन्हें दो चीजें खास तौर पर देखने को मिलीं। पहली जापान की टीम का अच्छा संघर्ष और दूसरी ऐसी पिच, जहां गेंद में काफी टर्न और बाउंस देखने को मिला।
एक स्पिनर के तौर पर अश्विन ने कहा कि उन्हें ऐसी पिच पर गेंद का घूमना देखकर काफी अच्छा लगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में ओलंपिक में पांच या छह ओवर के छोटे मैचों का प्रारूप आता है तो जापान जैसी टीम मुकाबला कर सकती है।
भारत बड़ा स्कोर नहीं बना पाया
अश्विन ने कहा कि जब भारत ने बल्लेबाजी शुरू की थी, तब उन्हें लग रहा था कि टीम आसानी से 50 से 60 रन बना सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और भारतीय टीम पांच ओवर में सिर्फ 32 रन ही बना सकी।
उनके मुताबिक, इस मैच ने एक बार फिर दिखाया कि क्रिकेट में पिच का प्रदर्शन पर कितना असर पड़ता है। अश्विन ने कहा कि क्रिकेट दूसरे कई खेलों से अलग है, क्योंकि यहां पिच के हिसाब से पूरे खेल का रुख बदल सकता है।
फ्लैट पिच की आदत
अश्विन ने भारतीय बल्लेबाजी को लेकर कहा कि टीम को ऐसी परिस्थितियों में परेशानी हो सकती है, जहां पिच सपाट न हो और गेंद में टर्न या लैटरल मूवमेंट मौजूद हो।
उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के दूसरे हिस्सों में भारतीय टीम के खिलाफ गेंद को ज्यादा मदद देने वाली पिचें तैयार की जाती हैं, तो भारतीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आईपीएल का भी जिक्र
अश्विन ने कहा कि भारतीय खिलाड़ी आईपीएल में लंबे समय से फ्लैट पिचों पर खेलने के आदी हो चुके हैं। उन्होंने ईटीपीएल के पहले सीजन का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की बाउंड्री करीब 65 से 68 मीटर की थीं।
उन्होंने टिम डेविड के एक शॉट का उदाहरण भी दिया। अश्विन के मुताबिक, उन्हें लगा था कि वह शॉट आईपीएल के मैदानों पर आसानी से छक्का चला जाता, लेकिन छोटी समझी जाने वाली दूरी पर भी गेंद बाउंड्री के पार नहीं जा सकी और बल्लेबाज आउट हो गया।
अश्विन के मुताबिक, अलग-अलग पिच और मैदान की परिस्थितियों में खेलने से भारतीय टीम को अपनी बल्लेबाजी के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है।





