Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी सिया गोयल ने वारदात को अंजाम देने से पहले कई अहम जानकारियां इकट्ठा की थीं। उसने यह पता लगाने की कोशिश की थी कि पुलिस कस्टडी में महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार होता है, क्या पुलिस मारपीट करती है और महिला कैदियों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सारी जानकारी उसने पहले से अपनी योजना का हिस्सा बनाकर जुटाई थी।
प्रेमी के साथ मिलकर की हत्या
पुलिस के अनुसार, पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या उनकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर की। फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जांच लगातार जारी है और पुलिस कई अहम सबूत जुटाने में लगी हुई है।
दूसरे मोबाइल से मिल सकते हैं नए सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस फोन में हत्या की साजिश, योजना और वारदात से जुड़े अहम सबूत मिल सकते हैं। इसी वजह से मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि इससे केस से जुड़े कई नए तथ्य सामने आएंगे।
राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ रही कड़ियां
जांच अधिकारियों का मानना है कि इस मामले की कई बातें राजा रघुवंशी हत्याकांड से मिलती-जुलती हैं। पुलिस के मुताबिक, जिस तरह सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी को पहाड़ की चोटी से धक्का देकर मारने का आरोप है, उसी तरह सिया गोयल और चेतन चौधरी पर केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले से धक्का देकर हत्या करने का आरोप है। इसी वजह से दोनों मामलों के बीच समानता की चर्चा हो रही है।
पुलिस का क्या है दावा
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच अधिकारियों का कहना है कि सिया गोयल ने कथित तौर पर सोनम रघुवंशी मामले से सीख लेते हुए अपनी योजना को ज्यादा मजबूत बनाया। पुलिस का मानना है कि उसने पहले से बचाव की संभावित दलीलों पर भी काम किया था। हालांकि, जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
पछतावे के कोई संकेत नहीं
पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान सिया गोयल और चेतन चौधरी ने अपने व्यवहार में किसी तरह का पछतावा नहीं दिखाया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने हत्या को लेकर अफसोस भी जाहिर नहीं किया। जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत, मोबाइल डेटा और अन्य दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए जा सकें।







