नई दिल्ली ऑनलाइन डेस्क। दिल्ली विधानसभा चुनाव की 70 सीटों के नतीजे आठ फरवरी को आ गए। बीजेपी ने 48 सीट जीतकर 27 साल बाद सत्ता में वापसी की। वहीं आम आदमी पार्टी के खाते में सिर्फ 22 सीटें आईं। दलित-मुस्लिम (डीएम) बाहूल्य वाली 14 सीटों पर अगर इन दोनों समाज के मतदाताओं के साथ अरविंद केजरीवाल को नहीं मिलता तो आप की हालत और खराब हो जाती। ये दोनों ही समुदाय पारंपरिक रूप से आप के वोट बैंक की रीढ़ हैं और 2025 के चुनाव में भी खुलकर आप के साथ रहे।
19 में से 14 सीटों पर आप की जीत
दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 22 सीटों पर जीत मिली। इनमें वह 14 सीटें भी हैं, जहां पर मुस्लिम और दलित मतदाता अच्छी संख्या में हैं। आठ फरवरी को आए चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी हार के बावजूद 14 सीटों पर दो समुदायों का दबदबा रहा और एक बार फिर पार्टी को बड़े पैमाने पर समर्थन मिला। दरअसल, दिल्ली में 19 दलित-मुस्लिम बाहूल्य सीटें हैं। इन सीटों पर जीत-हार यही दोनों समुदाय तय करते हैं। इस बार आप ने इन 19 सीटों में से 14 सीटें जीतीं, जो लगभग 75 फीसदी स्ट्राइक रेट है।
बीजेपी-कांग्रेस ने की सेंधमारी
2020 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने इन सीटों पर 100 फीसदी जीत दर्ज की थी। पिछले दो चुनावों की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने सभी 12 दलित बहुल सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि मुस्लिम बाहूल्य 7 सीटों पर भी झाड़ू चला। पर 2025 के चुनाव में बीजेपी ने अनुसूचित जाति बाहूल्य सीटों में आप के वोटबैंक में सेंधमारी की। दलित वोटों के इस बड़े बदलाव की वजह से आप आदमी पार्टी को को 4 एससी आरक्षित सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। कुछ ऐसा ही हाल मुस्लिम बाहूल्य सीटों का रहा। यहां एआईएमआईएम और कांग्रेस ने आप के मुस्लिम वोटों को कुछ हद तक काटने में कामयाब रही। जिसके कारण आप को एक सीट का नुकसान हुआ।
जीते पर वोट प्रतिशत पर गिरावट
एससी आरक्षित उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सीमापुरी सीट पर आप को लगभग 18 फीसदी कम वोट मिले, लेकिन फिर भी वह जीतने में सफल रही। इस सीट पर आप को 65.8 फीसदी वोट मिले, जो घटकर 48.4 फीसदी रह गया। करोल बाग सीट एक और उदाहरण है, जहां 2020 में वोट शेयर 62.2 फीसदी से घटकर 2025 में 50.8 फीसदी रह गया। पास के पटेल नगर निर्वाचन क्षेत्र में आप का वोट शेयर 60.8 फीसदी से घटकर 49 फीसदी हो गया। फिर भी आप इन सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही। कह सकते हैं कि बड़े पैमानें पर मतदाता आप के साथ रहे।
बीजेपी ने जीतीं चारों एससी सीट
आम आदमी पार्टी ने इस बार बीजेपी के हाथों चार एससी आरक्षित बवाना, मादीपुर, मंगोलपुरी और त्रिलोकपुरी सीटें गंवा दी। 2020 में बवाना में आप को 48.4 फीसदी वोट मिले थे जो इस बार घटकर 38.3 फीसदी रह गए और लगभग सभी 10 फीसदी वोट बीजेपी को गए। मंगोलपुरी निर्वाचन क्षेत्र में आप ने 13 फीसदी वोट खो दिए और बीजेपी को 16 फीसदी का लाभ हुआ। त्रिलोकपुरी में आप ने कुल वोट का 6 फीसदी खो दिया और बीजेपी ने उसमें से 3 फीसदी का लाभ उठाया और मामूली अंतर से जीत हासिल की। मादीपुर सीट पर आप का वोट शेयर 56 फीसदी से घटकर 36 फीसदी रह गया। यानी कुल 20 फीसदी बीजेपी को का लाभ हुआ।
बंटवारे के बाद भी आप की जीत
2020 में आप ने मुस्लिम बाहूल्य सात सीटों पर 53.2 फीसदी वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। ं मुसलमानों ने पार्टी के लिए एकमुश्त वोट दिया था। इस बार आप-एआईएमआईएम और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोटों का तीन-तरफ़ा बंटवारा हुआ। ओखला में आप को निर्वाचन क्षेत्र में कुल वोटों का सिर्फ़ 33 फीसदी मिला, जबकि ओवैसी की पार्टी को 16.6 फीसदी वोट मिले और कांग्रेस को लगभग 6 फीसदी वोट मिले। ओखला में मुस्लिम वोटों में तीन-तरफा विभाजन हुआ। फिर भी ये सीट आप जीतने में सफल रही। ओखला में आव को 2020 की तुलना में 24 फीसदी कम वोट मिले। इनमें से 19 फीसदी वोट एआईएमआईएम को और 4 फीसदी कांग्रेस को गए।
6 सीटें जीतने में सफल रही आप
दिल्ली में 7 सीट मुस्लिम बाहूल्य हैं। आप ने 2020 में ये सभी सीटें जीती थीं। 2025 के चुनाव में आप मुस्तफ़ाबाद सीट पर बीजेपी से हार गई। लेकिन अन्य 6 सीटें जीतने में सफल रही। जानकार बताते हैं कि दिल्ली के दलित-मुस्लिम वोटर्स बड़े पैमाने पर आप के साथ रहे। दोनों समुदाय के वोटर्स ने झाड़ू की बटन दबाई। हालांकि बीजेपी और कांग्रेस ने मुस्लिम- दलित वोटों में सेंधमारी की। जानकार बताते हैं कि जिस तरह से दोनों समुदाय के वोट कांग्रेस को गए, वह अरविंद केजरीवाल के लिए आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।