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Paper Leak Case: गेस पेपर” के नाम पर कैसे खेला गया खेल, पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, सीबीआई जांच तेज

NEET Paper Leak Investigation Case

NEET Paper Leak Case:नीट पेपर लीक मामले में अब जांच और भी तेज हो गई है। हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में आरसीसी क्लासेस के संचालक शिवराज मोटेगावकर का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में उनके कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह नीट परीक्षा के सवालों को लेकर बड़े दावे करते दिखाई दे रहे हैं। जांच एजेंसियों ने इन वीडियो को सबूत के तौर पर अपनी जांच में शामिल कर लिया है। माना जा रहा है कि इन वीडियो के बाद मोटेगावकर पर शक और गहरा हो गया है।

परीक्षा से पहले कराई गई खास मॉक टेस्ट

सूत्रों के मुताबिक, 3 मई को हुई नीट परीक्षा से पहले 27 अप्रैल को शिवराज मोटेगावकर ने अपने कोचिंग संस्थान में एक खास मॉक टेस्ट कराई थी। इस टेस्ट के लिए छात्रों को करीब 60 पन्नों की एक PDF भेजी गई थी। यह PDF मोटेगावकर के हाथ से लिखे नोट्स पर आधारित थी।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस मॉक टेस्ट में दिए गए लगभग 135 सवाल असली नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र से बिल्कुल मिलते-जुलते पाए गए। कई सवाल तो हूबहू वही थे, जो असली परीक्षा में पूछे गए।

“गेस पेपर” के नाम पर बड़ा खेल

शिवराज मोटेगावकर ने छात्रों को बताया था कि यह सिर्फ एक “गेस पेपर” है। लेकिन सीबीआई को शक है कि यही असल में लीक हुआ असघंटों पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारीली प्रश्नपत्र था। जांच के दौरान एजेंसी को एक हस्तलिखित दस्तावेज भी मिला है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

सूत्रों का कहना है कि इस बार पेपर लीक करने के लिए डिजिटल तरीके का इस्तेमाल नहीं किया गया। तकनीकी जांच से बचने के लिए पूरा पेपर हाथ से लिखा गया था। इसी तरीके ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा और अब यह मामला बड़े रैकेट की तरफ इशारा कर रहा है।

लातूर कनेक्शन भी आया सामने

जांच में महाराष्ट्र के लातूर का नाम भी सामने आया है। सीबीआई अब तक इस मामले में करीब 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें पी. वी. कुलकर्णी और मॉडर्न कॉलेज की शिक्षिका मनीषा मांढरे भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग नीट प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि क्या इन्हीं लोगों के जरिए पेपर शिवराज मोटेगावकर तक पहुंचाया गया था।

जब सीबीआई को 60 पन्नों वाला हस्तलिखित दस्तावेज मिला, तब शिवराज मोटेगावकर को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई। जांच के दौरान उनसे सवालों के स्रोत के बारे में पूछा गया, लेकिन वह कोई साफ और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

इसके बाद तकनीकी जांच और हस्तलिखित सबूतों के आधार पर सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है।

आगे और बड़े खुलासों की उम्मीद

नीट पेपर लीक मामला अब काफी बड़ा बन चुका है। जांच एजेंसियों को शक है कि इसमें कई और बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

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