NTA Exam Controversy and Earnings: देश में लगातार पेपर लीक की खबरों के बीच एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। NEET 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्र परेशान हैं और अब नई परीक्षा तारीख का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच लोगों का ध्यान NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कमाई पर भी गया है।
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, NTA ने साल 2018 से 2024 के बीच परीक्षा फीस से कुल 3,513.98 करोड़ रुपये कमाए। इनमें से करीब 3,064.77 करोड़ रुपये परीक्षा कराने में खर्च किए गए, जबकि लगभग 449 करोड़ रुपये एजेंसी के पास बच गए। इतने बड़े बजट के बाद भी बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामले सामने आने से लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं की गई।
हर साल तेजी से बढ़ी NTA की कमाई
पिछले कुछ वर्षों में NTA की कमाई लगातार बढ़ती गई।
साल 2018-19 में एजेंसी की आय सिर्फ 101.51 करोड़ रुपये थी।
इसके बाद 2019-20 में यह बढ़कर 488.08 करोड़ रुपये हो गई।
2021-22 में एजेंसी ने 494.46 करोड़ रुपये कमाए।
फिर 2022-23 में बड़ा उछाल आया और कमाई 873.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
साल 2023-24 में NTA ने रिकॉर्ड 1,065.38 करोड़ रुपये की आय दर्ज की।
इन आंकड़ों से साफ है कि कुछ ही सालों में एजेंसी की कमाई कई गुना बढ़ गई।
CUET शुरू होने के बाद बढ़ी आय
साल 2022 में CUET परीक्षा शुरू होने के बाद NTA की कमाई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली। पहले एजेंसी मुख्य रूप से NEET और JEE जैसी परीक्षाएं करवाती थी, लेकिन CUET आने के बाद लाखों नए छात्र इससे जुड़ गए।
CUET में छात्रों से विषयों के हिसाब से फीस ली जाती है। तीन विषयों तक के लिए लगभग 750 रुपये फीस देनी होती है, जबकि ज्यादा विषय चुनने पर फीस 1,750 रुपये तक पहुंच जाती है। इसी वजह से एजेंसी की कमाई में अचानक बड़ा इजाफा हुआ।
कमाई के साथ बढ़े विवाद
जैसे-जैसे NTA का काम बढ़ा, वैसे-वैसे विवाद भी बढ़ते गए। 2024 में NEET पेपर लीक मामले ने पूरे देश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। मामला इतना बढ़ गया कि इसकी जांच CBI तक को करनी पड़ी। अब 2026 में फिर परीक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि जब एजेंसी के पास इतना पैसा और संसाधन मौजूद हैं, तो परीक्षा सुरक्षा में बार-बार लापरवाही क्यों हो रही है।
परीक्षा कराने वालों को समय पर भुगतान नहीं
इस विवाद में एक और बात सामने आई है। NTA परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था संभालने के लिए स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षकों को सिटी कोऑर्डिनेटर बनाती है। यही लोग परीक्षा के दौरान पूरी व्यवस्था संभालते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कई कोऑर्डिनेटरों को लंबे समय तक भुगतान नहीं मिला। कुछ मामलों में बकाया रकम लाखों रुपये तक पहुंच गई। ऐसे में लोगों का कहना है कि एक तरफ एजेंसी के पास करोड़ों रुपये बच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ काम करने वालों को समय पर पैसे नहीं मिल रहे।
संसद में भी उठा मामला
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद Vivek K. Tankha ने NTA की कमाई और परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में सरकार ने संसद में एजेंसी की आय और खर्च से जुड़े आंकड़े पेश किए।
विपक्ष का आरोप है कि एजेंसी ने परीक्षाओं का दायरा तो तेजी से बढ़ाया, लेकिन सुरक्षा और सिस्टम को उतना मजबूत नहीं बनाया। वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए लगातार तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
करोड़ों छात्रों का भविष्य जुड़ा
NTA सिर्फ परीक्षा कराने वाली संस्था नहीं है। NEET से मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलता है, JEE Main इंजीनियरिंग कॉलेजों का रास्ता खोलता है और CUET से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एडमिशन होता है। ऐसे में करोड़ों छात्रों का भविष्य इस एजेंसी पर निर्भर करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े बजट और संसाधनों के बावजूद परीक्षा व्यवस्था बार-बार विवादों में क्यों आ रही है।









