Rahul Gandhi Protest: NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत से रिहा होने के बाद राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रदर्शन की वजह बताई और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।
संसद में चर्चा को लेकर सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई घटनाओं पर सदन में चर्चा कराने की मांग की थी। राहुल के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे साफ हो गया कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं करना चाहती। इसके बाद विपक्ष ने छात्रों की आवाज को देश के सामने रखने के लिए प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला किया।
राहुल की चार बड़ी मांगें
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की है। दूसरी मांग उन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है, जिन पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी के आरोप हैं। तीसरी मांग आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और मुकदमों को वापस लेने की है। चौथी मांग संसद के दोनों सदनों में इस पूरे मुद्दे पर तत्काल विस्तृत चर्चा कराने की है।
हिरासत में लिए गए नेता
प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए विपक्षी नेताओं को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन और कुछ नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया। कांग्रेस नेताओं की हिरासत की खबर मिलने के बाद कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मंदिर मार्ग पुलिस थाने पहुंचीं। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा और छात्रों के समर्थन में नारेबाजी की।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कांग्रेस नेताओं ने साफ किया है कि छात्रों को न्याय मिलने तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। पार्टी की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई गई है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली में सियासी तापमान और बढ़ गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और जोर पकड़ सकता है।


