Ghaziabad Power Crisis: Ghaziabad में इस बार गर्मी शुरू होते ही बिजली की मांग ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बीते साल जून में जितनी बिजली खपत दर्ज हुई थी, उतनी खपत इस बार मई महीने में ही पहुंच गई है। 21 मई को जिले में बिजली की खपत 2100 एमवीए दर्ज की गई, जो पिछले साल की सबसे ज्यादा खपत के बराबर है।
जून में और बढ़ सकती है बिजली मांग
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जून में भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत 2500 एमवीए तक पहुंच सकती है। मई 2025 में अधिकतम खपत 1841 एमवीए थी, लेकिन इस बार अभी तक यह आंकड़ा 259 एमवीए ज्यादा हो चुका है। अभी मई खत्म होने में भी करीब एक सप्ताह बाकी है, इसलिए आने वाले दिनों में बिजली की मांग और बढ़ने की संभावना है।
बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ती खपत के कारण जिले की बिजली व्यवस्था चरमराने लगी है। ट्रांस हिंडन इलाके के कई हिस्सों में लोग लंबे बिजली कट से परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह लोगों को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। बिजली विभाग के मुताबिक जिले में करीब 40 प्रतिशत फीडर ओवरलोड चल रहे हैं। केवल शहरी इलाकों में ही 42 प्रतिशत फीडर पर ज्यादा दबाव है।
क्षमता से कम लोड पर भी सिस्टम फेल
पारेषण विभाग के अनुसार जिले की कुल बिजली क्षमता 3338 एमवीए है। इसके मुकाबले अभी अधिकतम लोड केवल 62 प्रतिशत तक पहुंचा है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था जवाब देने लगी है। अधिकारियों का मानना है कि अगर जून में खपत 2500 एमवीए तक पहुंचती है तो स्थिति और मुश्किल हो सकती है।
गांव से शहर तक कटौती का असर
शहर और गांव दोनों इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। शहरों में जहां 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य है, वहां लोगों को केवल 18 से 19 घंटे बिजली मिल पा रही है। तहसील क्षेत्रों में 16 से 17 घंटे और गांवों में करीब 14 से 15 घंटे ही बिजली सप्लाई हो रही है। इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
सबसे ज्यादा दबाव शहरी इलाकों में
जिले में कुल 766 फीडर हैं, जिनमें से 191 ओवरलोड चल रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा परेशानी देखने को मिल रही है। यहां 447 में से 190 फीडर पर अधिक लोड है। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी 41 प्रतिशत से ज्यादा फीडर दबाव में चल रहे हैं।
विभाग ने तैयारियों का किया दावा
पारेषण विभाग के अधीक्षण अभियंता रामानंद चौहान का कहना है कि विभाग ने बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए सभी जरूरी तैयारियां कर ली हैं। उनका कहना है कि जून में खपत 2500 एमवीए तक पहुंच सकती है, लेकिन विभाग हालात संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।









