Cyber Fraud: Digital Arrest का झांसा, ATS अधिकारी बनकर किया ब्लैकमेल, डॉक्टर और इंजीनियर कैसे बने शिकार,

गोरखपुर में डॉक्टर को एटीएस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का झांसा दिया गया, जबकि अमेरिका में इंजीनियर से 2.50 लाख रुपये की ठगी हुई। पुलिस ने चेतावनी दी है कि संदिग्ध कॉल या लिंक पर भरोसा न करें।

Digital Arrest: गोरखपुर के सहजनवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. व्यास कुशवाहा साइबर अपराधियों का शिकार होते-होते बच गए। ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर उन्हें आतंकवादियों से जोड़ने का आरोप लगाया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। यही नहीं, एक अन्य मामले में अमेरिका में रहने वाले इंजीनियर से ठगों ने 2.50 लाख रुपये उड़ा लिए।

डॉक्टर को फंसाने की कोशिश

घटना शुक्रवार दोपहर की है। डॉ. व्यास कुशवाहा को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने खुद को एटीएस दिल्ली का राजीव यादव बताया और कहा कि पकड़े गए आतंकी आसिफ फौजी ने पूछताछ में आपका नाम लिया है।इसके बाद ठग ने डॉक्टर को डराने के लिए वॉट्सऐप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजे। करीब 45 मिनट तक वह डॉक्टर को फोन पर उलझाता रहा। कभी स्थानीय भू-माफियाओं से सांठगांठ का आरोप लगाता, तो कभी बैंक खाता और पैन कार्ड की जानकारी मांगता।।डॉक्टर घबरा गए और मामले की जानकारी एसपी क्राइम को दी। साइबर सेल ने तुरंत समझ लिया कि यह ठगी का मामला है और डॉक्टर को फोन काटने की सलाह दी। इसके बाद डॉ. व्यास ने सहजनवां थाने में तहरीर दी और साइबर थाने में भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।

कैसे काम करता है ठगों का गिरोह?

खुद को एटीएस, सीबीआई या एनआईए का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं।

आतंकवाद, हवाला या मनी लांड्रिंग का झूठा आरोप लगाते हैं।

वॉट्सऐप पर फर्जी नोटिस या गिरफ्तारी वारंट भेजते हैं।

पहले पैन-आधार जैसी पहचान मांगते हैं, फिर बैंक खाता नंबर।

गिरफ्तारी और जेल की धमकी देकर पीड़ित पर मानसिक दबाव बनाते हैं।

एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
इंजीनियर से 2.50 लाख की ठगी

एक और मामले में अमेरिका में रहने वाले इंजीनियर को भी ठगों ने निशाना बनाया। 15 अगस्त 2025 को उन्हें एचडीएफसी बैंक के लोगो वाला एक वॉट्सऐप संदेश भेजा गया। संदेश में लिंक पर क्लिक कर बैंक से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बनाया गया।

इंजीनियर ने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया, फोन में एक एपीके फाइल डाउनलोड हो गई और उनका मोबाइल ठगों के कब्जे में चला गया। कुछ ही मिनटों में खाते से 2.50 लाख रुपये निकल गए।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए साइबर थाना पुलिस ने 2.02 लाख रुपये वापस दिलवा दिए और बाकी रकम की रिकवरी की कोशिश जारी है।

इन दोनों मामलों से साफ है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को फंसा रहे हैं। सरकारी एजेंसियों के नाम पर डराना, फर्जी लिंक भेजना और मोबाइल पर कब्जा करना इनके मुख्य हथकंडे हैं। सतर्कता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।

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