Bone Cancer Symptoms: आजकल बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच बोन कैंसर (हड्डियों का कैंसर) को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि यह कैंसर अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है, लेकिन ऑन्कोलॉजिस्ट का कहना है कि कई मरीज शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी, विटामिन डी की कमी, बढ़ती उम्र या पुरानी चोट का असर समझकर महीनों तक नजरअंदाज करते रहते हैं। ऐसी लापरवाही कई मामलों में बीमारी के इलाज को जटिल बना सकती है।
लगातार रहने वाला हड्डियों का दर्द हो सकता है पहला संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, बोन कैंसर का सबसे सामान्य शुरुआती लक्षण लगातार रहने वाला हड्डियों का दर्द है। शुरुआत में यह हल्का हो सकता है, लेकिन समय के साथ इसकी तीव्रता बढ़ने लगती है। कई मरीजों को रात के समय दर्द ज्यादा महसूस होता है और आराम करने के बाद भी राहत नहीं मिलती। यदि हड्डियों का दर्द तीन से चार सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
सूजन या गांठ को हल्के में न लें
हड्डी या जोड़ के आसपास सूजन या गांठ महसूस होना भी बोन कैंसर का संकेत हो सकता है। कई बार यह गांठ दर्द देती है, जबकि कुछ मामलों में इसमें दर्द नहीं होता। यदि गांठ लगातार बढ़ रही हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
बिना बड़ी चोट के फ्रैक्चर भी हो सकता है संकेत
बोन कैंसर हड्डियों को कमजोर कर सकता है, जिससे मामूली चोट लगने पर या बिना किसी स्पष्ट कारण के भी फ्रैक्चर हो सकता है। इसे पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर कहा जाता है और इसे गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
अन्य लक्षणों पर भी रखें नजर
लगातार थकान, बिना कारण वजन कम होना, कमजोरी और बार-बार बुखार आना भी कुछ मरीजों में देखने को मिल सकता है। हालांकि ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन यदि ये हड्डियों के दर्द के साथ दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चों में भी हो सकता है बोन कैंसर
विशेषज्ञों का कहना है कि बोन कैंसर केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। बच्चों और किशोरों में भी यह बीमारी हो सकती है। यदि बच्चे के पैरों में लगातार दर्द हो, दर्द बढ़ता जाए या वह लंगड़ाकर चलने लगे, तो इसे केवल ‘ग्रोइंग पेन’ मानकर टालना ठीक नहीं है।
समय पर जांच और इलाज है सबसे जरूरी
बोन कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन, पीईटी-सीटी और बायोप्सी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। समय रहते बीमारी की पहचान होने पर सर्जरी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और अन्य आधुनिक उपचारों की मदद से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
