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World Health Organization के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस के प्रकोप को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया। इस घोषणा के बाद अफ्रीकी देशों में स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
हालांकि WHO ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के मानदंडों को पूरा नहीं करती। संगठन ने देशों को अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद न करने की सलाह दी है, ताकि जरूरी आवाजाही और आपूर्ति प्रभावित न हो।
बुंडीबुग्यो वायरस बना चिंता की वजह
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह प्रकोप इबोला के दुर्लभ प्रकार बुंडीबुग्यो वायरस के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है।
इबोला एक गंभीर और अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, उल्टी या वीर्य के संपर्क में आने से फैलती है। यह बीमारी अक्सर जानलेवा साबित होती है।
अब तक सामने आए सैकड़ों संदिग्ध मामले
Africa Centres for Disease Control and Prevention के मुताबिक अब तक 336 संदिग्ध मामले और 87 मौतें दर्ज की गई हैं। WHO ने बताया कि अधिकांश मामले कांगो से सामने आए हैं, जबकि दो मामले पड़ोसी देश युगांडा में दर्ज किए गए।
बीमारी के फैलने की शुरुआती सूचना कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी से मिली थी, जो युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमा के करीब स्थित है। इसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में निगरानी और जांच बढ़ा दी है।
WHO ने जताई चिंता
WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि संक्रमित लोगों की वास्तविक संख्या और बीमारी के भौगोलिक फैलाव को लेकर अभी काफी अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही संदिग्ध मामलों के बीच महामारी संबंधी कड़ियों को समझना भी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते निगरानी, जांच और आइसोलेशन जैसे कदम उठाना बेहद जरूरी होगा, ताकि संक्रमण को बड़े स्तर पर फैलने से रोका जा सके।



