World Brain Day 2026: आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, घंटों बैठकर काम करना और अनियमित दिनचर्या का असर अब मस्तिष्क स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई दे रहा है। न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक, माइग्रेन, डिमेंशिया, पार्किंसन और अन्य तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। चिंता की बात यह है कि ये समस्याएं अब 30 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में भी तेजी से देखी जा रही हैं।
हर महीने सैकड़ों मरीज पहुंच रहे अस्पताल
विश्व मस्तिष्क दिवस के अवसर पर नोएडा के विशेषज्ञों ने बताया कि न्यूरोलॉजी ओपीडी में हर महीने लगभग 300 से 320 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें स्ट्रोक, माइग्रेन, मिर्गी, पार्किंसन, डिमेंशिया, परिधीय न्यूरोपैथी और रीढ़ व नसों से जुड़ी बीमारियां प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी इन बीमारियों के बड़े कारण बन रहे हैं।
स्ट्रोक और डिमेंशिया के शुरुआती संकेत पहचानें
डॉक्टरों के अनुसार स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी, चेहरा टेढ़ा होना, बोलने में कठिनाई, तेज चक्कर, संतुलन बिगड़ना, धुंधला दिखना या अचानक असहनीय सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
वहीं, डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों में बार-बार भूलना, निर्णय लेने में कठिनाई, व्यवहार में बदलाव, सही शब्द याद न आना और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी शामिल हो सकते हैं।
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रक्तचाप और ब्लड शुगर नियंत्रित रखें, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, संतुलित भोजन लें, पर्याप्त पानी पिएं, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें तथा 7–8 घंटे की नींद लें। योग और ध्यान जैसी गतिविधियां तनाव कम करने में मदद करती हैं और मस्तिष्क को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।








