EU’s New Sanctions: रूस के खिलाफ EU की 21वें प्रतिबंध पैकेज की तैयारी, भारत की कई कंपनियां आयेंगी इसके दायरे में निकल जायेगा दिवाला

यूरोपीय संघ रूस के खिलाफ नया प्रतिबंध पैकेज लाने की तैयारी में है। इसका असर भारत सहित कई देशों की कंपनियों पर पड़ सकता है। रूस से जुड़े कारोबार करने वाले निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

EU’s New Sanctions Package Against Russia: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए अपने 21वें प्रतिबंध पैकेज का मसौदा तैयार कर लिया है। इस प्रस्ताव का मकसद रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना और उसकी युद्ध क्षमता को प्रभावित करना बताया जा रहा है। यदि इस पैकेज को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की मंजूरी मिल जाती है, तो इसका असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और तुर्की की कई कंपनियां भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 विदेशी कंपनियां नए नियमों से प्रभावित हो सकती हैं।

भारतीय कंपनियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। खासकर ऊर्जा, मशीनरी और औद्योगिक उत्पादों के क्षेत्र में दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं। लेकिन यूरोप के नए प्रतिबंध लागू होने पर भारतीय कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इन कंपनियों को यूरोपीय तकनीक, उपकरण और अन्य संवेदनशील उत्पादों तक पहुंच बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। रूस से जुड़े कारोबार करने वाले निर्यातकों को अतिरिक्त जांच और सख्त नियमों से गुजरना पड़ सकता है। इससे व्यापार की प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो सकती है।

रूस की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की तैयारी

यूरोपीय संघ का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य रूस की युद्ध से जुड़ी आर्थिक क्षमता को कमजोर करना है। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलस ने संकेत दिया है कि यह पैकेज रूस की “वॉर इकॉनमी” को प्रभावित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रस्तावित प्रतिबंधों के तहत लगभग 90 रूसी बैंकों की संपत्तियों को फ्रीज करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा 30 से अधिक बैंकों पर लेनदेन से जुड़े कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

सिर्फ बैंकिंग क्षेत्र ही नहीं, बल्कि तेल व्यापार, रिफाइनरी कारोबार, हथियार निर्माण और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म भी इस कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। रूसी ऊर्जा कारोबार को झटका देने के लिए एलएनजी गैस टैंकरों की बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी भी की जा रही है।

जहाजों और ड्रोन नेटवर्क पर भी होगी कार्रवाई

रूस पर लगे पुराने प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तथाकथित “शैडो फ्लीट” जहाजों पर भी यूरोपीय संघ की नजर है। ऐसे करीब 30 जहाजों को ब्लैकलिस्ट करने की योजना बनाई गई है। इनके साथ काम करने वाले अन्य जहाजों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा रूस के कुछ प्रमुख बंदरगाहों और हवाई अड्डों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल करने की तैयारी है। ड्रोन बनाने वाली 30 से अधिक कंपनियों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

यूरोपीय संघ युद्ध में इस्तेमाल होने वाली विशेष धातुओं, रसायनों और वाहन पुर्जों के निर्यात को भी सीमित करने की योजना बना रहा है। यदि यह पैकेज लागू होता है, तो वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Exit mobile version