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France Heatwave Deaths: फ्रांस में ऐतिहासिक भीषण गर्मी का कहर, 5,700 मौतों से टूटा 20 साल पुराना रिकॉर्ड

France Heatwave Deaths: यूरोप के प्रमुख देशों में शामिल फ्रांस इस साल भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक प्रभावों से जूझ रहा है। पिछले महीने आई ऐतिहासिक हीटवेव ने देश में मौतों का ऐसा आंकड़ा दर्ज किया, जिसने पिछले करीब दो दशकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। फ्रांस की सरकारी स्वास्थ्य एजेंसी पब्लिक हेल्थ फ्रांस के अनुसार, 17 जून से 2 जुलाई के बीच गर्मी से प्रभावित इलाकों में 21,674 लोगों की मौत हुई। विशेषज्ञों ने पिछले वर्षों के आंकड़ों के आधार पर सांख्यिकीय मॉडलिंग की और अनुमान लगाया कि सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि के दौरान करीब 15,910 मौतें होनी चाहिए थीं। इस तुलना के आधार पर हीटवेव के दौरान लगभग 5,700 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। आंकड़ों से पता चलता है कि गर्मी की वजह से मौतों में करीब 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों को सामने लाती है।

Record Heat Days

फ्रांस में इस साल जून के आखिरी सप्ताह में गर्मी ने बेहद खतरनाक रूप अपना लिया। 24 और 25 जून को देश के इतिहास के सबसे गर्म दिनों में शामिल किया गया। इन दिनों राष्ट्रीय औसत तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। चिंता की बात यह रही कि रात के समय भी तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं आई और कई स्थानों पर रात के तापमान के पुराने रिकॉर्ड टूट गए। स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, हीटवेव से हुई अतिरिक्त मौतों में आधे से ज्यादा मामले केवल 25 से 27 जून के बीच सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी की लहर बहुत तेजी से आई और इसका असर इतना तीव्र था कि लोगों को खुद को संभालने और शरीर को बढ़ते तापमान के अनुकूल बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका।

Paris में संकट

इस भीषण गर्मी का सबसे गंभीर असर फ्रांस की राजधानी पेरिस और उसके आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, इन इलाकों में 1,999 ऐसी अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जिनकी सामान्य परिस्थितियों में उम्मीद नहीं थी। यह सामान्य अनुमान की तुलना में करीब 80 प्रतिशत अधिक संख्या बताई गई है। मौतों की बढ़ती संख्या ने अंतिम संस्कार और शव प्रबंधन व्यवस्था पर भी भारी दबाव डाल दिया। हालात इतने गंभीर हो गए कि पेरिस के कुछ मुर्दाघरों में शव रखने की क्षमता लगभग पूरी हो गई। अंतिम संस्कार सेवाओं से जुड़े लोगों को शवों को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में क्षमता पूरी होने के कारण मुर्दाघरों को शव वापस भी करने पड़े।

Hospitals पर दबाव

हीटवेव के दौरान अस्पतालों और बुजुर्गों की देखभाल करने वाले केंद्रों पर भी दबाव तेजी से बढ़ा। आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, गर्मी से जुड़ी मौतों में करीब आधे मामले अस्पतालों में दर्ज किए गए। वहीं, लगभग एक-तिहाई लोगों की मौत घरों में हुई, जबकि बाकी मौतें बुजुर्गों के लिए बनाए गए केयर होम में सामने आईं। अत्यधिक तापमान का सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को माना जाता है। गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और हृदय संबंधी परेशानियों का जोखिम बढ़ जाता है। फ्रांस का यह आंकड़ा यूरोप में बढ़ती गर्मी के व्यापक संकट की ओर भी इशारा करता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल पूरे यूरोप में भीषण गर्मी से 10,000 से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान सामने आया है, जिससे जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता और गहरी हो गई है।

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