Defence Partnership: साइप्रस और ग्रीस के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों से भूमध्यसागर देशों की राजनीति में भारत मजबूत स्थिति में

भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ब्रह्मोस मिसाइल और ड्रोन खरीदने में साइप्रस की रुचि ने क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी है।

India Cyprus Defence Partnership: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत ने हाल के वर्षों में अपने रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत किया है। इसी कड़ी में भारत और साइप्रस के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है, जिसके बाद रक्षा क्षेत्र में नए अवसर खुलते दिखाई दे रहे हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साइप्रस दौरे और उससे पहले साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स की भारत यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी है। इन बैठकों के बाद रक्षा सहयोग को लेकर एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है।

ब्रह्मोस और ड्रोन में दिखाई रुचि

रक्षा क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, साइप्रस ने भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और कुछ आधुनिक ड्रोन प्रणालियों में रुचि दिखाई है। इनमें नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर जैसे ड्रोन भी शामिल बताए जा रहे हैं।

यदि भविष्य में कोई रक्षा समझौता होता है, तो यह यूरोपीय संघ के रक्षा कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध वित्तीय सहायता के माध्यम से संभव हो सकता है। हालांकि किसी अंतिम खरीद समझौते की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है।

क्षेत्रीय समीकरणों पर नजर

भूमध्यसागर क्षेत्र में साइप्रस, ग्रीस और तुर्की के बीच लंबे समय से कई राजनीतिक और समुद्री सीमा विवाद मौजूद हैं। ऐसे में भारत और साइप्रस के बढ़ते रक्षा संबंधों पर क्षेत्र के कई देशों की नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए रक्षा सहयोग का असर क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है। इसी वजह से इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में लगातार चर्चा हो रही है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी

भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है और कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है।

साइप्रस और ग्रीस जैसे देशों के साथ बढ़ते संबंध भारत की रक्षा कूटनीति को मजबूती दे सकते हैं। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को भी वैश्विक स्तर पर नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ती है।

ग्रीस और तुर्की के बीच पुराना विवाद

ग्रीस और तुर्की के बीच एजियन सागर और पूर्वी भूमध्यसागर के कई क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के लड़ाकू विमानों की गतिविधियों को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आई हैं।

दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हवाई क्षेत्र के उल्लंघन और सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि दोनों देशों ने अपने-अपने दावों को सही बताया है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस जारी है। विभिन्न देशों के लोग अपने-अपने नजरिए से इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कुछ लोग इसे भारत की मजबूत होती वैश्विक भूमिका के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे क्षेत्रीय राजनीति में नए बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर हैं कि आने वाले समय में भारत और साइप्रस के बीच रक्षा सहयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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