Indians Abroad, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को राज्यसभा में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि दुनिया के अलग-अलग देशों में भारतीयों की बढ़ती मौजूदगी के साथ उनकी सुरक्षा, राजनयिक सहायता और आपातकालीन निकासी का दायित्व भी लगातार बढ़ रहा है। सरकार विभिन्न संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने और जरूरत पड़ने पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
अमेरिका से डिपोर्ट
जयशंकर के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक अमेरिका ने 414 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया है। वहीं वर्ष 2025 के दौरान कुल 2,025 भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल ने एरिज़ोना में ‘ऑपरेशन चेकमेट’ के तहत 52 लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें शुरुआती जानकारी के मुताबिक 30 भारतीय नागरिक शामिल हो सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने कहा है कि वह संबंधित व्यक्तियों की आधिकारिक पहचान की पुष्टि का इंतजार कर रही है।
ईरान से सुरक्षित निकासी
विदेश मंत्री ने बताया कि फरवरी 2026 से ईरान में जारी संघर्ष के दौरान भारत ने 2,557 भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला है। इसके बावजूद अभी भी लगभग 7,000 भारतीय ईरान में मौजूद हैं। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी रखी हुई है।
साइबर स्कैम से राहत
विदेश मंत्रालय ने म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर सक्रिय साइबर स्कैम सेंटरों में फंसे भारतीयों की वापसी का भी उल्लेख किया। मंत्रालय के अनुसार, जबरन साइबर ठगी नेटवर्क में काम कराने के लिए फंसाए गए 1,741 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है। इसके लिए भारत को दोनों देशों की एजेंसियों के साथ कई सप्ताह तक समन्वय करना पड़ा।
बढ़ी विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी
राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़ने के साथ विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ रही हैं। चाहे युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से निकासी हो, विदेशों में गिरफ्तार भारतीयों को राजनयिक सहायता देना हो या मानव तस्करी और साइबर अपराध के शिकार नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना, सरकार इन सभी मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।








