Iran War: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सऊदी अरब यात्रा ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़ा सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से मजबूत है और अब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने एक नए संयुक्त रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों की सुरक्षा से जुड़ा मामला माना जाएगा।
ईरान की बढ़ी सक्रियता
इस घटनाक्रम के बीच ईरान और उसके सहयोगी समूहों की गतिविधियों ने खाड़ी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब और उसके आसपास के इलाकों को पहले भी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। ऐसे हमलों ने तेल प्रतिष्ठानों, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्रीय देशों को डर है कि मौजूदा संघर्ष और फैल सकता है।
हमलों में नुकसान
ईरान से जुड़े हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच कई स्थानों पर जान-माल के नुकसान की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में मृतकों और घायलों की संख्या अलग-अलग बताई जा रही है। इसलिए किसी एक आंकड़े को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने आम लोगों की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। पश्चिम एशिया में पहले से जारी युद्ध के कारण स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
पाकिस्तान की बड़ी भूमिका
शहबाज शरीफ और असीम मुनीर की सऊदी यात्रा को केवल कूटनीतिक दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब के साथ रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत करता आया है। साथ ही इस्लामाबाद ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश भी की है। अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की पहल पर अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम से जुड़ी बातचीत आगे बढ़ी थी।
क्षेत्रीय संकट गहराया
अब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग का नया समझौता पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतिक तस्वीर को और महत्वपूर्ण बना रहा है। ईरान ने इस समझौते को लेकर आलोचनात्मक रुख अपनाया है। विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में ईरान इस नए गठजोड़ को किस तरह देखता है और क्या इसके बाद सैन्य तनाव और बढ़ेगा। फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा, तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बनी हुई है।









