Iran US Peace Deal 2026: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति बातचीत का असर अब पूरी दुनिया के तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। समझौते की उम्मीद बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया, जबकि WTI क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। यह पिछले दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
शांति समझौते पर अटका मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन एक बड़ा मुद्दा अब भी अटका हुआ है। मामला कतर में फंसे ईरान के 12 अरब डॉलर के फंड को तुरंत जारी करने का है। ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए पैसे जल्द छोड़े जाएं, जबकि अमेरिका इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा है। इसी वजह से बातचीत में रुकावट बनी हुई है।
ट्रंप के बयान से बाजार में हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में संकेत दिए कि ईरान के साथ शांति समझौता करीब है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर समझौता हो जाता है, तो तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है और बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
रिपब्लिकन नेताओं ने जताई नाराजगी
हालांकि ट्रंप के इस रुख का विरोध उनके अपने दल के कई रिपब्लिकन नेताओं ने किया है। उनका कहना है कि ईरान के साथ जल्दबाजी में समझौता करना अमेरिका के लिए सही नहीं होगा। इस आलोचना पर ट्रंप ने जवाब देते हुए कहा कि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के सिर्फ विरोध करने में लगे हैं।
मोजतबा खामेनेई बने रहस्य
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी एजेंसी CIA और इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद अभी तक उनका ठिकाना पता नहीं कर पाई हैं। बताया जा रहा है कि उनका बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट चुका है और वह किसी गुप्त जगह पर मौजूद हैं।
गद्दाफी से की जा रही तुलना
कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस स्थिति की तुलना लीबिया के पूर्व शासक Muammar Gaddafi से कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब किसी देश में राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो शीर्ष नेताओं का अचानक सार्वजनिक रूप से गायब हो जाना कई तरह के सवाल खड़े करता है। हालांकि अभी तक ईरान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दुनिया की नजर बातचीत पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है, तो इससे तेल बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही दुनियाभर में बढ़ती महंगाई पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।


