इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए आगामी आम चुनाव आसान नहीं दिख रहा है। 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले चुनाव से करीब दो महीने पहले सामने आए सर्वे ने उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा सर्वे में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में नेतन्याहू से आगे नजर आ रहे हैं।
आइजेनकोट की बढ़त
गादी आइजेनकोट की पार्टी याशार ने हाल के सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को भी पीछे छोड़ने की स्थिति बनाई है। एक सर्वे के मुताबिक, आइजेनकोट को प्रधानमंत्री के तौर पर 49% लोगों का समर्थन मिला, जबकि नेतन्याहू 38% पर रहे। यानी दोनों नेताओं के बीच 11 प्रतिशत अंकों का अंतर दिखाई दिया।
बहुमत का पेच
हालांकि किसी एक नेता या पार्टी की बढ़त का मतलब यह नहीं है कि चुनाव का नतीजा तय हो गया है। इजराइल में सरकार बनाने के लिए संसद की 120 सीटों में कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी होता है। मौजूदा सर्वे में नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन इस आंकड़े से काफी दूर दिखाई दे रहा है। कुछ सर्वे में उनके गठबंधन को करीब 49 से 53 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
नेतन्याहू के सामने मुश्किलें
नेतन्याहू की चुनावी चुनौती केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है। गाजा युद्ध, सुरक्षा व्यवस्था, गठबंधन के भीतर मतभेद और सरकार की नीतियों को लेकर भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर गाजा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके मतभेद भी चर्चा में हैं। नेतन्याहू ने ट्रंप की हालिया गाजा योजना को स्वीकार करने से इनकार किया है, जबकि ट्रंप क्षेत्र में युद्ध खत्म करने और समाधान आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
ट्रंप के समर्थन पर भी नजर
नेतन्याहू के लिए एक और अहम मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख है। पिछले वर्षों में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच करीबी राजनीतिक संबंध रहे हैं, लेकिन इस बार ट्रंप ने अब तक चुनाव में नेतन्याहू का खुलकर समर्थन नहीं किया है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, नेतन्याहू की कमजोर चुनावी स्थिति और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच ट्रंप फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं।
नतीजे के लिए अभी इंतजार
फिलहाल सर्वे नेतन्याहू के लिए चिंता बढ़ाने वाले जरूर हैं, लेकिन चुनाव में अभी समय बाकी है। इजराइल की राजनीति में गठबंधन और सीटों का गणित बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए आइजेनकोट की बढ़त को सीधे नेतन्याहू की हार नहीं माना जा सकता। 27 अक्टूबर को होने वाला चुनाव यह तय करेगा कि इजराइल में नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता संभालते हैं या आइजेनकोट के नेतृत्व में नया राजनीतिक दौर शुरू होता है।






