Nepal Flood: नेपाल में अब भी छाया तबाही का मंजर, सैकड़ों मौतें और हजारों लोगों के लापता

नेपाल में चीन सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड से तबाही मची है। नेपाल में 734 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता हैं। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत, चीन और नेपाल की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

Nepal Flood: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 734 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,498 लोग लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

यह आपदा चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर के अचानक टूटने से शुरू हुई, जिसके बाद पानी, बर्फ और मलबे का तेज बहाव निचले इलाकों में पहुंचा। बाढ़ ने कई गांवों, सड़कों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया।

हाइड्रोपावर टनल में फंसे मजदूर

बाढ़ के कारण कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 हाइड्रोपावर साइट्स पर सैकड़ों कर्मचारी फंसे या संपर्क से बाहर हैं। अकेले कई प्रमुख परियोजनाओं की सुरंगों में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की जानकारी है।

नेपाल की सेना और स्थानीय बचाव दल मलबा हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग कर रही हैं।

विदेशी नागरिक भी लापता

नेपाल में लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ताजा सरकारी आंकड़ों में 589 विदेशी नागरिकों के लापता होने की बात सामने आई है। भारत के भी कई नागरिक प्रभावित क्षेत्रों में लापता बताए गए हैं, जबकि कई भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

तिब्बत में भी भारी तबाही

चीन की ओर तिब्बत में भी इस आपदा का असर पड़ा है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों का आंकड़ा 750 और लापता लोगों की संख्या 3,044 तक पहुंचती है।

बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं

भोटेकोशी नदी में पानी का स्तर बढ़ने को लेकर नेपाल में नया अलर्ट जारी किया गया है। राहत और बचाव दलों को नदी किनारे के इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भी मुश्किलें आ रही हैं।

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