Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह, जिन्हें युवाओं ने बदलाव और भ्रष्टाचार के खिलाफ उम्मीद के रूप में सत्ता तक पहुंचाया था, अब बड़े विरोध का सामना कर रहे हैं। जुलाई 2026 में काठमांडू में सैकड़ों लोगों ने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनके खिलाफ सबसे बड़ा जनविरोध माना जा रहा है।
झुग्गी हटाने की कार्रवाई बनी बड़ा मुद्दा
बालेन सरकार पर सबसे गंभीर आरोप बागमती नदी किनारे बसे झुग्गीवासियों को बिना पर्याप्त पुनर्वास के हटाने का है। रिपोर्टों के अनुसार हजारों परिवार प्रभावित हुए, जबकि सीमित संख्या में लोगों को ही अस्थायी आश्रय मिल सका। सामाजिक संगठनों ने सरकार पर संवैधानिक और मानवीय दायित्वों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
आत्मदाह की घटनाओं और बेरोजगारी पर सवाल
जुलाई के पहले सप्ताह में आत्मदाह की कोशिशों की घटनाओं ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। विपक्ष और युवा संगठनों का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे युवाओं के लिए ठोस कदम नहीं उठा सकी। यही युवा कभी बालेन शाह के सबसे बड़े समर्थक माने जाते थे।
‘सत्तावादी’ शैली के आरोप
विरोधियों का आरोप है कि बालेन शाह निर्णय लेने में मंत्रिमंडल और संस्थागत प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हैं। मीडिया से दूरी, संसद में सीमित उपस्थिति और सार्वजनिक मुद्दों पर कम प्रतिक्रिया देने के कारण उनकी कार्यशैली भी लगातार आलोचना के घेरे में है।
सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया?
अब तक बालेन शाह ने विरोध प्रदर्शनों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। उनके समर्थकों का कहना है कि सरकार विकास और प्रशासनिक सुधारों पर काम कर रही है, जबकि आलोचकों का मानना है कि बढ़ते जनाक्रोश के बीच प्रधानमंत्री की चुप्पी उनकी राजनीतिक चुनौती को और बढ़ा रही है।
