Onion Market Scam: सुनने में यह कहानी किसी फिल्म जैसी लग सकती है, लेकिन यह अमेरिका के इतिहास की सबसे चर्चित वित्तीय घटनाओं में से एक है। साल 1955 में दो कमोडिटी ट्रेडर्स ने प्याज के पूरे बाजार को अपने कब्जे में लेकर ऐसा खेल खेला कि हजारों किसानों की जिंदगी मुश्किल में पड़ गई। इस घटना ने सरकार को भी सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। आज भी अमेरिका में प्याज की फ्यूचर ट्रेडिंग पर रोक इसी मामले की वजह से लागू है।
कैसे शुरू हुआ खेल
इस कहानी के मुख्य किरदार थे सैम सीगल और विंसेंट कोसुगा। दोनों कमोडिटी कारोबार की अच्छी समझ रखते थे। उन्होंने मिलकर तय किया कि बाजार में जितना संभव हो सके उतना प्याज और उससे जुड़े फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीद लिए जाएं। कुछ ही महीनों में उन्होंने शिकागो में मौजूद करीब 98 प्रतिशत प्याज की सप्लाई पर नियंत्रण कर लिया। उनके पास लगभग 3 करोड़ पाउंड प्याज का स्टॉक था। अब बाजार में प्याज की कीमतों पर उनका बड़ा असर हो चुका था।
किसानों पर बढ़ा दबाव
जब बाजार की कमान उनके हाथ में आ गई तो किसानों पर दबाव बनना शुरू हुआ। किसानों को डर था कि अगर एक साथ इतना प्याज बाजार में आ गया तो कीमतें गिर जाएंगी और उनकी फसल का कोई खरीदार नहीं मिलेगा। इसी डर की वजह से कई किसानों ने ऊंची कीमत पर प्याज खरीदना शुरू कर दिया। दूसरी ओर, दोनों ट्रेडर्स ने कमोडिटी बाजार में ऐसी शॉर्ट पोजीशन ली, जिसमें उन्हें कीमत गिरने पर फायदा होना था। यानी वे पहले से ही कीमतों में गिरावट से कमाई की तैयारी कर चुके थे।
कीमतें हुईं धराशायी
कुछ समय बाद दोनों ने अपने गोदामों में रखा भारी मात्रा का प्याज एक साथ बाजार में उतार दिया। अचानक सप्लाई इतनी बढ़ गई कि प्याज की कीमतें तेजी से नीचे आ गईं। पहले 50 पाउंड प्याज की कीमत करीब 2.75 डॉलर थी, लेकिन कुछ ही समय में यह घटकर केवल 10 सेंट रह गई। हालात इतने खराब हो गए कि प्याज रखने वाली जालीदार थैली की कीमत भी उसके अंदर रखे प्याज से ज्यादा हो गई। हजारों किसान भारी नुकसान में चले गए और कई लोग कर्ज के बोझ तले दब गए।
बना सख्त कानून
इस पूरे मामले के बाद अमेरिका में किसानों और आम लोगों का गुस्सा बढ़ गया। मामला संसद तक पहुंचा, जहां बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति बने जेराल्ड फोर्ड ने भी किसानों के पक्ष में आवाज उठाई। आखिरकार 1958 में Onion Futures Act लागू किया गया। इस कानून के तहत अमेरिका में किसी भी कमोडिटी एक्सचेंज पर प्याज की फ्यूचर ट्रेडिंग को हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। आज भी यह कानून लागू है और इसे बाजार में हेराफेरी रोकने के सबसे बड़े उदाहरणों में गिना जाता है।






