भारतीय मूल की पिया डांडिया ने अमेरिका के फ्लोरिडा में 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद के निचले सदन में जगह बना ली है। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार डांडिया ने रिपब्लिकन प्रत्याशी और मरीन कॉर्प्स की पूर्व सैनिक केसी आस्कर को कड़े मुकाबले में हराया। घोषित नतीजों के मुताबिक, पिया को 51.9 फीसदी वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी को 49.1 फीसदी वोट हासिल हुए। इस जीत के साथ वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली नई भारतीय-अमेरिकी सांसद बन गई हैं।
किसे कितने वोट मिले?
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में मुकाबला पिया डांडिया और रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी आस्कर के बीच था। चुनाव परिणामों में पिया को 51.9 फीसदी और आस्कर को 49.1 फीसदी वोट मिले।
पिया डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से मैदान में थीं। वहीं, उनकी प्रतिद्वंद्वी केसी आस्कर मरीन कॉर्प्स में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। इस मुकाबले में जीत के बाद पिया अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सदस्य बन गई हैं।
बदली सीट, बदला चुनावी मुकाबला
पिया डांडिया ने शुरुआत में फ्लोरिडा के 21वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। यहां उनका मुकाबला हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन और रिपब्लिकन नेता ब्रायन मास्ट से हो सकता था।
हालांकि, निर्वाचन क्षेत्रों के नए परिसीमन के बाद उन्होंने दक्षिण फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा। इस सीट पर कोई मौजूदा सांसद चुनावी मुकाबले में नहीं था।
इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने उनकी जीत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह सीट डेमोक्रेट्स के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही थी और पिया ने जीत दर्ज कर पार्टी को यहां सफलता दिलाई।
कौन हैं पिया डांडिया?
पिया डांडिया पहली पीढ़ी की भारतीय-अमेरिकी हैं। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका पहुंचे थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद वह न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाईस्कूल की प्रिंसिपल बनीं।
बताया जाता है कि महज 28 साल की उम्र में वह अमेरिका की सबसे कम उम्र की हाईस्कूल प्रिंसिपलों में शामिल हो गई थीं। उनके द्वारा शुरू किए गए स्कूल में 86 फीसदी विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से आते थे। खास बात यह रही कि वहां से पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थी कॉलेज पहुंचे।
भारतीय मूल के लोगों के लिए खास उपलब्धि
पिया डांडिया की जीत से अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को एक और पहचान मिली है। शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल के रूप में काम करने के बाद अब वह अमेरिकी संसद के निचले सदन में अपनी भूमिका निभाएंगी।
















