Russia Election Putin United Russia: रूस में 2026 का संसदीय चुनाव पूरा हो गया है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की है। 95% से ज्यादा वोटों की गिनती के बाद पार्टी को 57.83% वोट मिले और 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें मिलने की स्थिति बनी। इससे पार्टी का संवैधानिक बहुमत बरकरार रहा।
यह चुनाव 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव था। पुतिन ने इसे अपनी सरकार और यूक्रेन युद्ध के लिए जनता के समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया था।
नतीजे पहले से तय?
चुनाव से पहले ही यूनाइटेड रशिया की जीत की उम्मीद काफी मजबूत मानी जा रही थी। रूस की राजनीतिक व्यवस्था में क्रेमलिन के विरोधियों के लिए सीमित जगह और कई विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना होती रही है। एपी और रॉयटर्स ने भी चुनावी माहौल को कड़े नियंत्रण वाला बताया है।
फिर भी चुनाव सिर्फ राष्ट्रपति चुनने के लिए नहीं हुआ था। इस प्रक्रिया के जरिए रूस की संसद यानी स्टेट ड्यूमा के सदस्यों का चुनाव हुआ, जिसका काम कानून बनाना और सरकार की नीतियों से जुड़े फैसलों में भूमिका निभाना है।
पुतिन को मिला बहुमत
2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया को आधिकारिक तौर पर 49.8% वोट मिले थे। इस बार उसका वोट प्रतिशत बढ़कर 57.83% हो गया। 355 सीटों के साथ पार्टी के पास ड्यूमा की करीब 79% सीटें होंगी।
यह आंकड़ा 2016 में पार्टी की 343 सीटों की पिछली रिकॉर्ड संख्या से भी ज्यादा है। संवैधानिक बहुमत का मतलब है कि पार्टी को कई अहम विधायी और संवैधानिक प्रक्रियाओं में दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ती।
वोट का क्या महत्व?
यह कहना सही नहीं होगा कि रूस में किसी व्यक्ति का वोट पूरी तरह बेकार है। औपचारिक चुनाव व्यवस्था में ड्यूमा की 450 सीटों के लिए दो तरीके इस्तेमाल होते हैं।
225 सीटें पार्टी-लिस्ट आनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए तय होती हैं। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी को संसद में सीट पाने के लिए 5% वोट की सीमा पार करनी होती है। बाकी 225 सीटें अलग-अलग सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं।
इसलिए किसी पार्टी के लिए राष्ट्रीय वोट प्रतिशत बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर जब वह 5% की सीमा के आसपास हो। वहीं किसी करीबी निर्वाचन क्षेत्र में कुछ हजार वोट सीधे यह तय कर सकते हैं कि उम्मीदवार जीतेगा या हारेगा।
फिर चुनाव क्यों जरूरी?
चुनाव का एक उद्देश्य संसद की संरचना तय करना है। इसके अलावा इससे सत्ताधारी दल को अपने समर्थन का आधिकारिक आंकड़ा पेश करने का अवसर मिलता है। रूस में इस बार क्रेमलिन ने नतीजों को देश में पुतिन और उनकी नीतियों के समर्थन के संकेत के रूप में पेश किया है।
दूसरी तरफ, आलोचक चुनावी प्रतिस्पर्धा, विपक्ष की स्थिति और प्रक्रिया की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। इसलिए रूस के चुनाव को समझने के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किस पार्टी ने कितने वोट या सीटें जीतीं, बल्कि यह भी देखना पड़ता है कि चुनाव किस राजनीतिक माहौल में हुआ।







