Saudi Oil सऊदी अरब की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर 11 सितंबर को ड्रोन हमला हुआ था। सऊदी और इराकी अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन इराक से आए थे। हमले में पाइपलाइन से जुड़े तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए और इसके बाद तेल का प्रवाह रोकना पड़ा।
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल पश्चिमी तट पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इसके जरिए तेल को फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से बचाकर लाल सागर के रास्ते दूसरे देशों तक भेजा जा सकता है।
यूरोप को अक्टूबर में झटका
रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी सरकारी तेल कंपनी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनरियों को बताया है कि उन्हें अक्टूबर में सऊदी कच्चे तेल की सप्लाई नहीं मिलेगी। सामान्य तौर पर यूरोपीय ग्राहक टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत हर महीने सऊदी तेल लेते हैं, लेकिन पाइपलाइन बंद होने से कुछ कार्गो रद्द किए गए हैं।
यूरोप के कुछ खरीदारों ने इस कमी को पूरा करने के लिए दूसरे देशों से तेल लेना शुरू कर दिया है। पोलैंड की कंपनी ऑर्लेन ने भी नॉर्थ सी समेत अन्य क्षेत्रों से वैकल्पिक कच्चा तेल खरीदा है।
मरम्मत में लग सकते हैं हफ्ते
पाइपलाइन की आंशिक क्षमता कुछ दिनों में बहाल करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पूरी क्षमता लौटने में पांच से छह हफ्ते लग सकते हैं। हमले से हुए नुकसान की वजह से मरम्मत का समय अभी निश्चित नहीं है।
पाइपलाइन हाल में रोज करीब 40-50 लाख बैरल तेल ले जा रही थी, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 4-5% है। इसलिए लंबे समय तक व्यवधान रहने पर वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
तेल महंगा होने की चिंता
यूरोप को सऊदी तेल की जगह दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है। अलग-अलग प्रकार के कच्चे तेल को रिफाइनरियों में इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है, जिससे लागत बढ़ सकती है।
पाइपलाइन की सामान्य आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो यूरोप में कच्चे तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सऊदी अरब वैकल्पिक समुद्री रास्तों से कुछ तेल की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है।

