Donald Trump ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच बनी युद्ध जैसी स्थिति को टैरिफ की धमकी देकर रोका था। उनका कहना है कि अगर उन्होंने दखल नहीं दिया होता तो दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच बड़ा युद्ध छिड़ सकता था।
ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अब तक आठ बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाया है और भारत-पाकिस्तान का मामला भी उन्हीं में से एक है।
भारत-पाक तनाव पर फिर पुराना बयान
ट्रंप जिस घटना का जिक्र कर रहे हैं, वह भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर माना जा रहा है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इस कार्रवाई में कई आतंकी ढांचे तबाह किए गए थे।
हालांकि भारत ने ट्रंप के इस दावे को पहले भी खारिज किया था और अब भी उसका रुख साफ है कि भारत की सैन्य कार्रवाई पूरी तरह स्वतंत्र रणनीतिक निर्णय था। भारत सरकार का कहना है कि युद्धविराम या तनाव कम करने में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी।
भारत ने क्यों किया ट्रंप के दावे का खंडन?
भारत का स्पष्ट कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम का फैसला दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर की सीधी बातचीत के बाद लिया गया था। भारत ने संसद में भी यह स्पष्ट किया था कि किसी बाहरी दबाव या अमेरिकी हस्तक्षेप के कारण ऑपरेशन नहीं रोका गया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी संसद में साफ कहा था कि भारत की सुरक्षा नीति और सैन्य फैसले पूरी तरह देशहित में और स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं।
पाकिस्तान ने किया ट्रंप के दावे का समर्थन
ट्रंप के इस दावे को पाकिस्तान की ओर से समर्थन मिला है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif पहले भी ट्रंप की भूमिका की सराहना कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने ट्रंप को धन्यवाद संदेश भी भेजा था।
राजनीतिक बयान या कूटनीतिक रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी चुनावी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में अपनी छवि मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रंप पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर खुद को ‘शांतिदूत’ बताने वाले बयान देते रहे हैं।
फिलहाल भारत की तरफ से यही संदेश साफ है कि देश की सुरक्षा और सैन्य फैसले किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होते हैं।








