ब्रिटेन में पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए वीजा नियमों में सख्ती चिंता बढ़ा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में ब्रिटेन जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या करीब 20% तक घट सकती है। अगर ऐसा हुआ तो इसका असर सिर्फ भारतीय छात्रों पर नहीं, बल्कि ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी और उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
ब्रिटेन में भारतीय छात्र विदेशी विद्यार्थियों का बड़ा हिस्सा हैं। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक के एक साल में भारतीय नागरिकों को 82,523 स्टडी वीजा दिए गए। कुल स्टडी वीजा में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी करीब 23% रही। हालांकि, एक साल में भारतीय छात्रों के वीजा में 16% की कमी दर्ज की गई।
वीजा नियमों में बदलाव
ब्रिटेन ने जनवरी 2024 से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ आने वाले आश्रितों यानी पति-पत्नी और बच्चों के नियमों को सख्त किया था। अब ज्यादातर छात्रों को अपने परिवार को साथ ले जाने की अनुमति नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ा है जो मास्टर डिग्री के लिए ब्रिटेन जाते हैं।
ब्रिटेन सरकार के मुताबिक, जून 2026 तक के एक साल में कुल 3.83 लाख स्पॉन्सर्ड स्टडी वीजा जारी हुए। यह पिछले साल की तुलना में 11% कम और जून 2023 के रिकॉर्ड स्तर से 41% कम है। सरकार ने माना है कि 2024 के नियमों के बाद स्टडी वीजा में गिरावट आई है।
भारतीय छात्र सबसे आगे
ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या अभी भी काफी बड़ी है। 2024-25 में भारत से करीब 95 हजार नए छात्र ब्रिटेन पहुंचे थे। इसी अवधि में भारत ब्रिटेन के लिए विदेशी छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत रहा। हालांकि, पिछले दो वर्षों में भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट आई है।
भारतीय छात्रों में मास्टर डिग्री सबसे लोकप्रिय है। मार्च 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन जाने वाले करीब 81% भारतीय छात्र मास्टर स्तर की पढ़ाई के लिए पहुंचे थे।
ब्रिटेन को आर्थिक नुकसान
भारतीय छात्रों की संख्या घटने का सीधा असर ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी फीस, किराए, परिवहन, भोजन और दूसरी सेवाओं पर पड़ सकता है। विदेशी छात्र स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ी रकम खर्च करते हैं।
20% की संभावित कमी के कारण ब्रिटेन को सालाना करीब ₹10 हजार करोड़ के आर्थिक नुकसान का अनुमान बताया जा रहा है। हालांकि यह एक अनुमान है और वास्तविक नुकसान छात्रों की संख्या, उनकी पढ़ाई की अवधि और खर्च के स्तर पर निर्भर करेगा।
दूसरे देशों से मुकाबला
ब्रिटेन में विदेशी छात्रों की संख्या पहले ही रिकॉर्ड स्तर से नीचे आ चुकी है। 2024-25 में ब्रिटेन के उच्च शिक्षा संस्थानों में 6.85 लाख विदेशी छात्र थे, जो 2022-23 के रिकॉर्ड स्तर से करीब 10% कम है।
ऐसे समय में ब्रिटेन का मुकाबला अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और दूसरे देशों से भी है। इन देशों में पढ़ाई और उसके बाद काम करने के विकल्प छात्रों के फैसले को प्रभावित करते हैं।
ब्रिटेन के लिए चुनौती यह है कि वह इमिग्रेशन पर नियंत्रण की अपनी नीति और विदेशी छात्रों से होने वाले आर्थिक लाभ के बीच संतुलन बनाए। भारतीय छात्रों के लिए भी अब यूनिवर्सिटी चुनने के साथ वीजा नियम, परिवार को साथ ले जाने की अनुमति और पढ़ाई के बाद काम करने के विकल्प महत्वपूर्ण हो गए हैं।




