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Kanpur Update: नगर निगम में ETF प्रभारी ने इस्तीफे की पेशकश, बोले- ताकतवर लोग नहीं करने दे रहे काम

Kanpur Municipal Corporation ETF Officer

 Kanpur Municipal Corporation ETF Officer:कानपुर नगर निगम में इनफोर्समेंट टास्क फोर्स (ईटीएफ) के प्रभारी रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल आलोक नारायन ने नगर आयुक्त को इस्तीफे की पेशकश करते हुए तीन महीने का नोटिस दिया है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। उनका कहना है कि जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्हें स्वतंत्र तरीके से काम नहीं करने दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतवर लोग लगातार उनके काम में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं।

काम में दखल

ETF प्रभारी के मुताबिक वह नगर निगम की जिम्मेदारियों को नियमों के अनुसार निभाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन कई मामलों में बाहरी दबाव और हस्तक्षेप के कारण कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी निभाने की स्वतंत्रता ही नहीं मिलेगी तो शहर में व्यवस्था सुधारने का काम कैसे होगा। इसी वजह से उन्होंने इस्तीफे की पेशकश करने का फैसला लिया है।

पार्षदों पर आरोप

इस पूरे विवाद में पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन का नाम भी सामने आया है। ETF प्रभारी ने एसोसिएशन से जुड़े लोगों पर काम में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ पार्षद अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके नगर निगम की कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके।

निगम में बढ़ा विवाद

नगर निगम में अधिकारी और पार्षदों के बीच अधिकारों और कामकाज को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से इस्तीफे की पेशकश किए जाने से मामला गंभीर माना जा रहा है। इससे नगर निगम के अंदर काम करने के तरीके और अधिकारियों को मिलने वाली प्रशासनिक स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

कार्रवाई पर नजर

इस्तीफे की पेशकश के बाद अब नगर निगम प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ अधिकारी के आरोपों की जांच करना जरूरी होगा, वहीं दूसरी तरफ पार्षदों और अधिकारियों के बीच समन्वय बनाए रखना भी अहम होगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों की भूमिका की जांच हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

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