Mirpur Blast: कौशांबी के मीरपुर में हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। कहीं घर का कमाने वाला सदस्य नहीं बचा तो कहीं मासूम बच्चों की जिंदगी से माता-पिता और भाई-बहनों का साया उठ गया। हादसे के बाद इलाके में हर तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल है। इस घटना ने गया प्रसाद साहू और रेलवे कर्मचारी विक्रम सरोज के परिवारों को ऐसी त्रासदी दी है, जिसका दर्द शायद पूरी जिंदगी कम न हो पाए।
विक्रम का परिवार
चरवा क्षेत्र के सझिया गांव निवासी 35 वर्षीय विक्रम सरोज रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उन्होंने मीरपुर में अपना घर बनाया था, जहां पत्नी अंजू, 12 वर्षीय बेटी संजना, 10 वर्षीय बेटे अंश और चार वर्षीय शिवांश उर्फ नन्हा के साथ उनका परिवार हंसी-खुशी रहता था। सोमवार को हुए लगातार धमाकों ने इस परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी। हादसे में विक्रम, उनकी पत्नी और दोनों बेटों की मौत हो गई। अब परिवार में सिर्फ 12 वर्षीय संजना बची है।
खेत में छिपी संजना
संजना के लिए वह दिन किसी डरावने सपने से कम नहीं था। उसने बताया कि उसके पिता की तैनाती मनौरी रेलवे स्टेशन पर थी। घटना के समय करीब 11 बजे वह खाना खाने के लिए घर आए थे। मां ने रसोई के पास उनके लिए भोजन लगाया था। संजना पिता से पैसे लेकर चॉकलेट खरीदने दुकान चली गई। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद लगातार कई विस्फोट होने लगे। घबराई संजना घर लौटने के बजाय जान बचाने के लिए धान के खेत में छिप गई। कीचड़ में उसके कपड़े और शरीर सन गए। उसे अंदाजा भी नहीं था कि इसी दौरान उसके माता-पिता और दोनों भाई हमेशा के लिए उससे दूर हो चुके हैं।
गया प्रसाद पर दुख
मीरपुर निवासी गया प्रसाद साहू प्रयागराज की एक मिठाई की दुकान पर काम करते हैं। रोज की तरह वह घटना वाले दिन भी काम के लिए घर से निकले थे। घर में उनकी पत्नी अनीता, बेटी जान्हवी और तीन बेटे आदित्य, रवि और अमित मौजूद थे। प्रयागराज पहुंचने से पहले ही उन्हें फोन पर घर में विस्फोट की खबर मिली। वह घबराए हुए वापस मीरपुर पहुंचे तो उनका मकान पूरी तरह ढह चुका था। पत्नी अनीता गंभीर हालत में एसआरएन अस्पताल में भर्ती मिलीं, लेकिन बेटी जान्हवी और तीनों बेटों की मौत हो चुकी थी। एक पिता के लिए यह ऐसी खबर थी, जिसने उसकी पूरी दुनिया ही खत्म कर दी।
घर भी नहीं बचा
विस्फोट ने सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि कई परिवारों से उनकी छत और रोजी-रोटी भी छीन ली। शेष नारायण पांडेय का दो मंजिला मकान धमाके में पूरी तरह धराशायी हो गया। वह खुद भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय उनके परिजन खेतों की ओर गए हुए थे, जिससे उनकी जान बच गई। मीरपुर और आसपास के इलाकों में ऐसे कई परिवार हैं, जिनके सामने अब अपनों को खोने के साथ घर और आर्थिक सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो गया है।
दो श्रमिकों की मौत
मनौरी निवासी धारा सिंह भी इस हादसे में बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी फैक्ट्री में काम करने वाले दो श्रमिकों की जान चली गई। धारा सिंह के मुताबिक घटना से कुछ समय पहले ही वह अपनी बूंदी की फैक्ट्री से माल लोड करवाकर भेज चुके थे और इसके बाद घर लौट आए थे। कुछ ही देर बाद उन्हें फैक्ट्री के तबाह होने की जानकारी मिली। मीरपुर का यह विस्फोट अपने पीछे सिर्फ मलबा नहीं छोड़ गया है, बल्कि कई परिवारों के जीवन में ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसे शायद कभी भरा नहीं जा सकेगा।








