हाल ही में, बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दो अलग-अलग कॉलेजों के छात्रों की मौत के मामले में शेख हसीना (Sheikh Hasina) के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। शेख हसीना और 12 अन्य के खिलाफ ढाका के सुत्रपुर इलाके में हुई हिंसा में इन दोनों छात्रों की हत्या का मामला दर्ज कराया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी BSS के अनुसार, 19 जुलाई को कोबी नजरूल कॉलेज और शहीद सुहरावर्दी कॉलेज के सामने सैकड़ों अन्य लोगों के साथ विरोध कर रहे इन छात्रों को पुलिस और अवामी लीग के समर्थकों ने कथित तौर पर गोली मार दी थी। मृतकों की पहचान कोबी नजरूल गवर्नमेंट कॉलेज के छात्र इकराम हुसैन कैसर और शहीद सुहावर्दी कॉलेज के छात्र ओमर फारुक के रूप में हुई। यह (Sheikh Hasina) मामला ढाका मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट टोंकुल इस्लाम की अदालत में दायर किया गया।
BNP नेता बलाल हुसैन ने भी शेख हसीना के खिलाफ एक मामला दर्ज कराया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वह और 113 अन्य लोग 2015 में BNP नेता खालिदा जिया के काफिले पर हुए हमले में शामिल थे। इस हमले में 500 से 700 अज्ञात लोगों के भी शामिल होने का दावा किया गया है। इस घटना की FIR ढाका के तेजगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है।
पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ एक अन्य मामला 18 वर्षीय कॉलेज छात्र नजीबुल सरकार की 4 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान हुई मौत से जुड़ा है। यह केस छात्र के पिता मजीदुल सरकार ने जोयपुरहाट चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दर्ज कराया। इसमें 128 अन्य लोगों जिनमें, एक अवामी लीग नेता और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री शामिल हैं को नामजद किया गया है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश पीपुल्स पार्टी (BPP) के अध्यक्ष बाबुल सरदार चखारी ने ढाका मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में एक याचिका दायर की है। इसमें अदालत से मांग की गई है कि 2013 में हिफाजत-ए-इस्लाम द्वारा शापला चौक में आयोजित रैली पर अंधाधुंध गोलीबारी कर सामूहिक हत्या करने के आरोप में शेख हसीना और 33 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। आपको बता दें, इन सभी मामलों के बाद बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या अब 12 हो गई है। इनमें से 9 मामले हत्या के 1 अपहरण और 2 मानवता के खिलाफ अपराध और जातीय जनसंहार से जुड़े हैं।
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इस महीने की शुरुआत में 5 अगस्त को बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत में आ गई थीं। अब वह हत्या, अपहरण, और जातीय जनसंहार के आरोपों का सामना कर रही हैं। बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद हुई हिंसा में 230 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही, सरकारी नौकरियों में विवादित आरक्षण प्रणाली के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।