शाहिद कुरैशी ने थापर नगर की गली नंबर-7 में एक मकान करीब ₹1 करोड़ में ख़रीदा, जिसके साथ उसने रजिस्ट्री भी करवाई। शाहिद और उनका परिवार वहाँ दूध का कारोबार शुरू कर चुका था। तीन दिन पहले ही थापरनगर में रहना शुरू किया जिसका पंजाबी समाज के करीब 100 परिवारों ने विरोध करते हुए हंगामा कर दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दूध लेने आने वाले ग्राहकों की गाड़ियों व बाइक से गली में जाम लगने लगा है। आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होने लगी।
विरोध और ‘घर बिकाऊ’ के पोस्टर
लेकिन स्थानीय पंजाबी समुदाय के करीब 100 परिवारों ने इस ख़रीद-फरोख्त का विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने अपने घरों और गलियों में ‘घर बिकाऊ है’ और ‘पलायन करने को मजबूर’ जैसे बोर्ड लगा दिए। इसके साथ ही विरोध के दौरान नारेबाजी हुई, और कुछ स्थानीय हिंदू संगठन, जैसे विश्व हिंदू परिषद तथा बजरंग दल ने भी मौके पर पहुँचकर शाहिद के मकान को खाली कराने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि शाहिद कुरैशी से मकान खाली कराओ, अन्यथा पंजाबी समाज पूरा थापरनगर खाली कर देगा।
पुलिस हस्तक्षेप और मकान पर ताला
विवाद और सामूहिक प्रदर्शन के बाद पुलिस intervened — शाहिद और उनके परिवार को पहले दूसरे स्थान पर भेजा गया, फिर थापर नगर में उनके मकान पर ताला लगा दिया गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर मामला शांत कराने की कोशिश की है। शनिवार को दोनों पक्षों को सदर बाजार थाने में बुलाया गया है ताकि बातचीत और पंचायत के माध्यम से समाधान निकाला जा सके। स्थानीय निवासी अमरजीत सिंह, हरमीत सिंह, राजेश जुनेजा, सचिन डालडा, अमित, हरजीत, पवन, ऋषभ आदि के साथ मिलकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान मकान बेचने वाले के खिलाफ भी कुछ लोगों ने गुस्सा जाहिर किया। बजरंग दल के नेता हिमांशु शर्मा ने कहा कि एक परिवार के लिए 500 परिवारों को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
शाहिद की आपत्ति
शाहिद ने कहा कि मकान उन्होंने कानूनी तरीके से खरीदा था रजिस्ट्री हुई थी और पूरी प्रक्रियाएँ पूरी की गई थीं। उन्होंने सवाल उठाया है: “इतना बड़ा विवाद मेरी एक मकान-खरीद पर क्यों?” उन्होंने कहा कि उनका मकान बेचने वाला पहले बेचना चाहता था, लेकिन हिंदू खरीदारों के न मिलने से उन्होंने शाहिद को मकान बेचा। पुलिस दोनों पक्षों से बातचीत के बाद कोई कानूनी या सामाजिक समाधान निकालने की तैयारी कर रही है। मामले को शांति और समझौते से सुलझाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाए ताकि धर्म-आधारित असहमति न फैले। पुलिस ने काफी समझाया, लेकिन पंजाबी समाज के लोग नहीं माने।










