Gemstone Benefits: वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों का उल्लेख मिलता है और प्रत्येक ग्रह से एक विशेष रत्न को जोड़ा गया है। इन्हें नवरत्न कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यता है कि इन रत्नों में विशेष ऊर्जा होती है और इन्हें सही तरीके से धारण करने पर ग्रहों से जुड़े सकारात्मक प्रभाव प्राप्त किए जा सकते हैं।
हालांकि, किसी भी रत्न को बिना जानकारी या ज्योतिषीय सलाह के धारण करने की सलाह नहीं दी जाती। रत्न कीमती होने के साथ-साथ ज्योतिषीय मान्यताओं से भी जुड़े होते हैं।
किस रत्न का असर कितने समय में माना जाता है?
ज्योतिष और रत्न शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग रत्नों के प्रभाव का समय अलग बताया गया है।
- नीलम (शनि): 24 से 72 घंटे
- लहसुनिया (केतु): 24 से 48 घंटे
- मोती (चंद्रमा): 2 से 3 दिन
- पन्ना (बुध): 5 से 7 दिन
- मूंगा (मंगल): 7 से 10 दिन
- पुखराज (बृहस्पति): 7 से 15 दिन
- माणिक्य (सूर्य): 7 से 15 दिन
- हीरा (शुक्र): 10 से 15 दिन
- गोमेद (राहु): 10 से 15 दिन
ध्यान रहे कि ये समय ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, वैज्ञानिक रूप से इन प्रभावों की पुष्टि नहीं हुई है।
कैसे पता चलता है कि रत्न असर कर रहा है?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सही रत्न धारण करने के बाद व्यक्ति को मानसिक शांति, बेहतर नींद और निर्णय लेने में आसानी जैसे बदलाव महसूस हो सकते हैं। सकारात्मक सोच बढ़ने और तनाव कम महसूस होने को भी इसके प्रभाव के संकेत के तौर पर बताया जाता है।
हालांकि, ऐसे बदलावों को केवल रत्न के प्रभाव से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। स्वास्थ्य या मानसिक परेशानी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
रत्न पहनने से पहले रखें ध्यान
रत्न धारण करने से पहले अपनी कुंडली और संबंधित ग्रह की स्थिति के बारे में योग्य ज्योतिषी से सलाह लेने की परंपरा है। केवल खूबसूरती या दूसरों की सलाह पर कोई रत्न पहनना उचित नहीं माना जाता।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। News1 india इसकी पुष्टि नहीं करता है।
