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Tanning Despite Using Sunscreen: धूप से त्वचा को बचाने के लिए अधिकांश लोग रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद जब चेहरे या हाथों पर टैनिंग नजर आने लगती है, तो कई लोग सोचते हैं कि सनस्क्रीन असर नहीं कर रही। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सनस्क्रीन में नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के तरीके में होती है।
आखिर क्या होती है टैनिंग?
टैनिंग कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। जब त्वचा पर सूरज की UV किरणें पड़ती हैं, तो शरीर मेलेनिन नामक पिगमेंट का उत्पादन बढ़ा देता है। यही मेलेनिन त्वचा को गहरा रंग देता है और उसे धूप से होने वाले नुकसान से बचाने की कोशिश करता है। इसलिए लंबे समय तक धूप में रहने पर टैनिंग होना सामान्य बात है।
सही मात्रा में सनस्क्रीन लगाना है जरूरी
अधिकतर लोग बहुत कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाते हैं, जिससे त्वचा को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, चेहरे और गर्दन पर पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन लगाना जरूरी है ताकि SPF का पूरा लाभ मिल सके। कम मात्रा में लगाने से UV किरणें त्वचा तक पहुंच सकती हैं और टैनिंग की समस्या बनी रहती है।
हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाएं सनस्क्रीन
सुबह एक बार सनस्क्रीन लगाकर पूरे दिन सुरक्षित रहने की उम्मीद करना गलत है। पसीना, त्वचा का तेल और बाहरी वातावरण इसके प्रभाव को कम कर देते हैं। यदि आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं, तो हर दो से तीन घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाना चाहिए।
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का करें चुनाव
सिर्फ SPF देखकर सनस्क्रीन खरीदना पर्याप्त नहीं है। कई सनस्क्रीन केवल UVB किरणों से सुरक्षा देती हैं, जबकि UVA किरणें भी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं और टैनिंग का कारण बनती हैं। इसलिए हमेशा ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, जो UVA और UVB दोनों से सुरक्षा प्रदान करती हो।
बादलों और खिड़कियों से भी पहुंचती हैं UV किरणें
कई लोग मानते हैं कि बादलों वाले दिन या कार के अंदर रहने पर सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती। जबकि UV किरणें बादलों और वाहन की खिड़कियों से होकर भी त्वचा तक पहुंच सकती हैं। यही वजह है कि सीधे धूप में न रहने के बावजूद टैनिंग हो सकती है।
सनस्क्रीन का असली काम क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, सनस्क्रीन का उद्देश्य टैनिंग को पूरी तरह रोकना नहीं है। इसका मुख्य काम त्वचा को गंभीर नुकसान, समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत, झाइयों और स्किन कैंसर जैसी समस्याओं से बचाना है। इसलिए यदि थोड़ी टैनिंग हो भी जाए, तब भी सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल जारी रखना चाहिए, क्योंकि यह आपकी त्वचा की लंबी अवधि की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।


