Health News:आजकल भारत में बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 50 फीसदी से अधिक बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण है और यह इस बात का संकेत देता है कि मोटापा अब एक आम समस्या बन चुका है।
मोटापे के बढ़ने के कारण; जीवनशैली में बदलाव
बच्चों में मोटापे का प्रमुख कारण उनकी जीवनशैली में हुए परिवर्तन हैं। आजकल के बच्चे अपना अधिकांश समय मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के सामने बिताते हैं। इस कारण शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है, और जंक फूड का सेवन भी बढ़ा है। नियमित व्यायाम न करने और बाहर खेलने की आदत छोड़ने से बच्चों का वजन तेजी से बढ़ रहा है।
खानपान की आदतें ;मानसिक तनाव
बच्चों की खानपान की आदतें भी काफी बदल गई हैं। वे अब तैलीय, मीठे और पैकेज्ड फूड का अधिक सेवन कर रहे हैं। फास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और स्नैक्स ने उनके नियमित भोजन का स्थान ले लिया है, जिससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा हो रही है। इसके साथ ही, भोजन में पोषण की कमी भी मोटापे का एक अन्य कारण बन रही है।
शारीरिक गतिविधियों की कमी
स्कूल के बाद अधिकांश बच्चे अपने खाली समय में खेलकूद में शामिल नहीं होते हैं। इसके बजाय, वे मोबाइल गेम्स खेलते हैं या टीवी देखते हैं। यह निष्क्रियता उनके शरीर में अतिरिक्त वजन बढ़ाने का मुख्य कारण बन रही है। पहले जहां बच्चे पार्कों में खेलते और दौड़ते थे, अब उनकी शारीरिक गतिविधि लगभग नगण्य हो गई है।
इससे वे भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते हैं और अस्वस्थ खाने की आदतें अपनाने लगते हैं, जिससे उनका वजन बढ़ जाता है।
मानसिक तनाव
कुछ मामलों में, बच्चों में मोटापे का कारण मानसिक तनाव भी हो सकता है। पढ़ाई का दबाव, प्रतिस्पर्धा और अन्य सामाजिक समस्याएं उन्हें तनाव में डाल सकती हैं। इससे वे भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाते हैं और अस्वस्थ खाने की आदतें अपनाने लगते हैं, जिससे उनका वजन बढ़ जाता है।
समस्या का समाधान
बच्चों में मोटापे की समस्या को रोकने के लिए जरूरी है कि माता-पिता और शिक्षक इस दिशा में ध्यान दें। उन्हें बाहर खेलने के लिए प्रेरित करना, संतुलित और पौष्टिक आहार देना और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही, स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना और घर का बना खाना खाने की आदत डालना भी मददगार हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बच्चों में मोटापा एक गंभीर वैश्विक समस्या है। यदि इसे समय पर नहीं रोका गया, तो भविष्य में यह और बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। मोटापे से ग्रस्त बच्चे अक्सर अन्य बीमारियों जैसे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।