Lucknow third railway line Project:लखनऊ में दिलकुशा-मल्हौर के बीच बन रही 8.20 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन परियोजना में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। रेल मंत्री से शिकायत के बाद रेलवे ने जांच शुरू कर दी है।
सामग्री पर सवाल
मामला 447 करोड़ रुपये की दिलकुशा-मल्हौर तीसरी रेल लाइन परियोजना से जुड़ा है। इसके तहत गोमती नदी पर मेजर ब्रिज संख्या 466, 468 और 469 समेत कई निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। परियोजना में सबस्ट्रक्चर, सुपरस्ट्रक्चर, पीएससी स्लैब, ओपन वेब स्टील गर्डर और अन्य संबंधित काम शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाले स्टील गर्डर की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा सीमेंट, सरिया और गिट्टी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अधिकारियों पर भी नजर
शिकायत में निर्माण की निगरानी से जुड़े रेलवे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें पीडब्ल्यूआई, असिस्टेंट इंजीनियर और सीनियर डिविजनल इंजीनियर स्तर के अधिकारियों पर कथित तौर पर काम की गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर निर्माण की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद जरूरी कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही कंपनी से जुड़े लोगों की ओर से कथित धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इन सभी बिंदुओं की जांच अब रेलवे के स्तर पर की जाएगी।
बैलास्ट भी सवालों में
रेलवे ट्रैक में स्लीपरों के नीचे इस्तेमाल होने वाली गिट्टी यानी बैलास्ट की गुणवत्ता पर भी शिकायत में आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि इस्तेमाल किया गया बैलास्ट आरडीएसओ के निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप नहीं है। रेलवे ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा में बैलास्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इसकी गुणवत्ता की जांच इस मामले में अहम होगी। इसके अलावा पुलों में इस्तेमाल होने वाले स्टील और कंक्रीट की गुणवत्ता भी तकनीकी जांच के दायरे में रहेगी।
विजिलेंस जांच शुरू
रेल मंत्री के पास शिकायत पहुंचने के बाद उत्तर रेलवे के विजिलेंस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। डिप्टी चीफ विजिलेंस ऑफिसर रजत कुमार ने जांच के लिए चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर प्रभाकर भारती को निर्देश दिए हैं। उन्हें व्यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता से मिलने और जांच प्रक्रिया तेजी से पूरी करने को कहा गया है। अब विजिलेंस टीम शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करेगी।
रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे
जांच के दौरान टेंडर की शर्तों और स्वीकृत तकनीकी मानकों से लेकर साइट पर इस्तेमाल सामग्री तक कई पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। स्टील और कंक्रीट की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, बैलास्ट की जांच, साइट निरीक्षण रिकॉर्ड, माप पुस्तिका, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अधिकारियों की निगरानी की भूमिका भी जांची जा सकती है। चूंकि मामला गोमती नदी पर बन रहे तीन रेलवे पुलों और नई तीसरी रेल लाइन जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल निर्माण कंपनी या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं। विजिलेंस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही साफ होगा कि निर्माण में वास्तव में गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन हुआ या नहीं।







