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Bombay High Court: माता-पिता की देखभाल न करने पर वापस ले सकते हैं दी गई संपत्ति, बॉम्बे हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि माता-पिता अपनी संपत्ति इस शर्त पर बच्चों को देते हैं कि वे उनकी देखभाल करेंगे और बच्चे ऐसा नहीं करते, तो वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 के तहत माता-पिता उस संपत्ति को वापस हासिल कर सकते हैं।

by Sadaf Farooqui
जुलाई 9, 2026
in राष्ट्रीय
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Bombay High Court ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि माता-पिता अपनी संपत्ति इस शर्त पर बच्चों को हस्तांतरित करते हैं कि वे उनकी देखभाल करेंगे, लेकिन बच्चे अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो माता-पिता उस संपत्ति को वापस लेने के हकदार हैं। अदालत ने यह भी कहा कि यह अधिकार केवल आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता तक सीमित नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

मामला मुंबई के लोअर परेल स्थित एक फ्लैट से जुड़ा है। 68 वर्षीय जौहरी ने वर्ष 2005 में खरीदा गया फ्लैट वर्ष 2023 में गिफ्ट डीड के जरिए अपने बेटे को इस शर्त पर दिया था कि वह अपने माता-पिता की देखभाल करेगा और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। लेकिन रिश्तों में खटास आने के बाद वर्ष 2025 में बुजुर्ग दंपती को घर छोड़ना पड़ा।

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इसके बाद उन्होंने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत ट्रिब्यूनल का रुख किया। ट्रिब्यूनल ने बेटे और उसके परिवार को 60 दिनों के भीतर फ्लैट खाली करने का आदेश दिया, जिसे बेटे ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने बेटे की दलील खारिज की

बेटे का तर्क था कि उसके पिता आर्थिक रूप से सक्षम हैं और उनके पास अन्य संपत्तियां भी हैं, इसलिए उन्हें इस कानून का लाभ नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और सम्मान सुनिश्चित करना भी है।

अदालत ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा कि यदि संपत्ति देखभाल की शर्त पर दी गई हो और उस शर्त का पालन न किया जाए, तो ट्रिब्यूनल गिफ्ट डीड को निरस्त कर सकता है।

वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को मिली मजबूती

हाई कोर्ट का यह फैसला उन बुजुर्ग माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो संपत्ति बच्चों के नाम करने के बाद उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं। अदालत ने साफ किया कि संपत्ति का हस्तांतरण बच्चों को माता-पिता की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता और शर्तों के उल्लंघन पर कानूनी कार्र

Tags: Bombay High CourtSenior Citizens Act
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Sadaf Farooqui

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